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What is Processor in hindi-प्रोसेसर क्या है पूरी जानकारी

आज हम बात करेंगे Processor क्या होता है ये काम कैसे करता है? साथ ही हम CPU के विभिन्न Components के बारे में भी जानेंगे।

ये पोस्ट पाठकों को Processors से संबंधित हर जानकारी उपलब्ध कराएगा।

जैसे इसके कार्य करने की तकनीक, क्यों दूसरी कंपनियां ये चिप नहीं बना पातीं, क्यों 40 साल पुरानी आर्किटेक्चर अब भी इस्तेमाल हो रही है इत्यादि।

इस मशीन युग में लगभग हर मशीन को चलाने के पीछे Microprocessor का हाथ होता है।

फिर वो वाशिंग मशीन, रोबोट्स, AI तकनीक, डिजिटल खिलौने, गैजेट्स हों सभी में प्रोसेसर का उपयोग होता है।

भारत का अपना पहला माइक्रोप्रोसेसर ‘SHAKTI’ है जो IIT मद्रास के कंप्यूटर विज्ञान के स्टूडेंट्स ने अपने प्रोफेसर्स के देख-रेख में बनाया।

ये RISC-V architecture पर based है जो completely Royalty free व Open-source platform है।

जिसपर कंपनियां microprocessors बना सकती हैं बिना किसी license purchase किए।

ये वही IIT-M है जो हाल ही में समुद्र के पानी से हाइड्रोजन ईंधन बनाने की तकनीक विकसित की है। जिसकी एक लीटर पांच लीटर पेट्रोल जितनी ऊर्जा देगा वो भी बिना CO2 उत्सर्जित किए।

खैर, चलिए इस रोचक व महत्वपूर्ण कंप्यूटर पार्ट या यूं कह लें कंप्यूटर के दिमाग के बारे में हम विस्तार से जानते हैं।

Processor क्या है?

Processor या CPU एक Silicon की बनी Logical Chip है। जो Decision making और Computing power होने के कारण कंप्यूटर का दिमाग कहलाता है।

Processor के कई नाम हैं जैसे CPU, Microprocessor, Central processor, Mainframe, powerpc या computer का brain इत्यादि। हिंदी में इसे संसाधक कहा जाता है।

प्रोसेसर्स अत्यंत छोटे आकार के transistors से मिलकर बनने वाली एक Chip है जिससे कंप्यूटर चलता है।

इन transistors की संख्या करोड़ों में होती है। मॉडर्न ट्रांजिस्टर्स अब अत्यंत छोटे होने के कारण खुली आंखों से भी साफ-साफ नहीं दिखते।

ये transistors जितने छोटे होंगे उतनी कम ऊर्जा के साथ वो अधिक तेजी से काम कर पाएंगे। साधरण रूप से Transistors एक Tiny switch होते हैं।

आजकल सबसे powerful व energy efficient प्रोसेसर्स होने के लिए transistors के बीच जितनी कम दूरी होगी वो प्रोसेसर उतना बेहतर कार्य करेगा।

उदाहरण के लिए एक ही जनरेशन, एक ही कंपनी, व एक जैसे पावर (Ghz) वाले dual core प्रोसेसर्स अगर एक नया व दूसरा पुराना है तो नया वाला बेहतर कार्य करेगा।

क्योंकि हो सकता है कि पुराना वाला Processor 10 नैनोमीटर तकनीक पर आधारित है जबकि नया वाला 7 नैनोमीटर पर।

नैनोमीटर जितना कम होगा व जनरेशन व processing पावर जितनी अधिक होगी वो CPU उतना ही बेहतर होगा।

इन्हीं को एक सेकंड में करोड़ों बार On/off होना होता है हमारे task को Execute करने के लिए।

लेकिन कोई जरूरी नहीं है ये हर बार अपने highest Capacity पर switch on/off हों।

ये कम और ज्यादा भी हो सकता है, निर्भर करता है हमारे द्वारा सिस्टम को दिए गए कार्य के ऊपर।

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अगर आज ये transistors नहीं होते तो हमारे कंप्यूटर पहले की भांति कई मंजिल जितनी ऊंचाई के होते।

आज Microsoft, Apple जैसी कंपनियां भी नहीं होती और हम अपने कंप्यूटर में अब भी Vaccume tube का इस्तेमाल कर रहे होते।

सुपरफास्ट कार्य करने के वजह से microchip थोड़े गर्म होने लगते हैं। इसीलिए Processors के ऊपर heatsink जिसे Thermal Paste भी कहते हैं लगाया जाता है।

उसके बाद इसके ऊपर CPU fan फिट किया जाता है।

सभी Microprocessors के मैन्युफैक्चरिंग में Photolithography की टेक्नोलॉजी उपयोग होती है।

CPU कितने प्रकार के होते हैं इनमें Cores क्या हैं?

CPU 6 प्रकार के होते हैं जिनके बारे में हम नीचे जानेंगे।

Single core- एकल कोर (एक प्रोसेसर)

Dual core – दो कोर (2 प्रोसेसर)

Quad core – चार कोर (4 प्रोसेसर)

Hexa core – छः कोर (6 प्रोसेसर)

Octa core – आठ कोर (8 प्रोसेसर)
Deca-core – दस कोर (10 प्रोसेसर)
…Multi-core processor.

कंपनियां उपभोक्ता स्तर पर मशीन्स में 2 से 24 Core देने लगी हैं। जबकि ये Server के लिए 48 भी हो सकता है।

CPU में Core से तात्पर्य एक ही CPU में (Integrated Circuit) पर प्रोसेसिंग के लिए और Processors को Add कर देना है।

सीधे शब्दों में कहें तो किसी को दो हाथ की जगह चार हाथ वाला बना देना है।

अगर bits के हिसाब से देखा जाए तो भी प्रोसेसर्स दो प्रकार के होते हैं 32-bit processors और 64-bits processors. bit जितनी अधिक होगी प्रोसेसर उतना तेज काम करेगा।

Best Processor का चुनाव कहीं न कहीं आपके जरूरत पर निर्भर करता है। जैसे मानलीजिए आपको Game खेलना पसंद है तो आपको intel Processors के नामकरण इत्यादि पर भी ध्यान देना चाहिए।

जैसे intel Core i3 के processors पर आप हल्के-फुल्के games जिसे entry level game कहते हैं उन्हें खेल सकते हैं।

जबकि Core i5 के processors पर Mid-level games खेला जा सकता है। जबकि i7 या i9 पर High-end games खेले जा सकते हैं।

ध्यान रहे कि सभी devices/processors किसी न किसी specific कार्य के लिए आते हैं।

इसलिए गेमिंग, वीडियो एडिटिंग, आफिस के कार्य हेतु अलग-अलग सिस्टम्स आते हैं जो किसी स्पेसिफिक task को Smoothly कर सकते हैं।

जैसा की आप नीचे Table में भी देख सकते हैं कि Cores बदलने के साथ-साथ Processor की अन्य क्षमताएं भी बढ़ती जाती हैं जो कि heavy data को fast प्रोसेस करने लिए जरूरी हैं।

  Frequency Cores Turbo boost Cache Hyper-threading
i3 2.4-3.6 GHz 2 No 3-4 MB Yes
i5 3-3.4 GHz 4 Yes 4-6 MB No
i7 2.0-3.5 GHz 4 Yes 8 MB Yes
i9 4.8-5.30 GHz 8 Yes 16-24 MB Yes

इसके अलावा हम Processor के Specification को देखते हैं। जैसे – अगर आपको गेमिंग लैपटॉप चाहिए तो AMD में Ryzen 9 5900x, जबकी Intel में Core i9 10900k इत्यादि। इसके बारे में details में जानने के लिए Intel के साइट पर देख सकते हैं।

क्योंकि इनमें Cache memory, Cores व Clock speed अच्छे हैं। जबकि आपको overclocking वाले CPU को भी तरजीह देनी होगी। इसके साथ-साथ Turbo boost CPU उन्हें कहते हैं जो Processor के तापमान के कम होने पर ऑटोमेटिक ही तेज स्पीड से data process करने लग जाते हैं।

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CPU कैसे काम करता है?

CPU में किसी भी operation को करने के 4 चरण होते हैं- Fetch, Decode, Execute और Writeback.

Fetch – इस कार्य में सिस्टम के RAM से Instruction को Program memory के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।

Decode – इस operation में Instruction decoder द्वारा कार्य को decode किया जाता है कि क्या कार्य मिला है, और क्या किया जाना है।

Execute – इस आपरेशन में कार्य पूरा कर लिया जाता है और CPU दुबारा Instructions को Carry करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

Write back – इस आपरेशन में रिजल्ट मेमोरी में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

Components of CPU

CPU के निम्न components होते हैं जिसकी मदद से वो अपने कार्य पूरे करता है।

Arithmetic Logic Unit (ALU)– इसमें Arithmetic जैसे + – × ÷ व Logical ऑपरेशन्स में जैसे AND, NAND, OR, NOT ऑपरेशन्स होते हैं।

Registers– CPU द्वारा प्रोसेसिंग के समय data व Instruction को temporary तौर पर स्टोर करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।

Registers छोटी मगर high speed temporary मेमोरी होती है जो CPU के अंदर होती है।

Control Unit (CU)– Processors के सभी कार्य कंट्रोल यूनिट द्वारा ही निर्देशित किए जाते हैं।

Cache – इसे CPU मेमोरी भी कहते हैं। ये सबसे तेज मेमोरी होती है लेकिन बहुत ही छोटी मेमोरी, लेकिन काफी महंगी (Expensive) होती है।

इस हार्डवेयर का तकनीकी रूप में असली नाम High Speed Static Random Access Memory (SRAM) है। इसके अलावे L2 व L3 Cache memory भी होती हैं जो CPU से अलग होती हैं।

इसका एक Portion CPU से directly integrated होता है। प्रोसेसिंग के वक्त प्रोसेसर RAM से पहले कैश मेमोरी को सबसे पहले एक्सेस करता है।

Internal buses – डेटा या इनफार्मेशन को carry करने के लिए CPU से जुड़े हुए Parralel wires के समूह को Internal buses कहते हैं।

ALU कैसे काम करता है?

नीचे हम ALU कैसे काम करता है उसे जानेंगे-

मानलीजिए हमे 100 और 50 को जोड़ना है।इस प्रक्रिया में ALU 100 अंक को Accumulator register में store करेगा।

जबकि दूसरे अंक 50 को Data register में store करेगा।
अब Control unit command भेजेगा ALU को इसे Addition करने के लिए।

अब दोनों अंक ALU के द्वारा जोड़ दिए गए। Result Accumulator में save हो गया है। यहां से रिजल्ट Main memory में भेज दिया जाएगा।

Main memory हार्डवेयर का तकनीकी असली नाम Dynamic Random access memory (DRAM) है।

इस प्रकार ALU कार्य करता है।

Processor में Clockspeed क्या है?

Clockspeed प्रोसेसर की data process करने की क्षमता को दर्शाता है। Clockspeed को Gigahertz में मापते हैं।

CPU cycle के हिसाब से कार्य करता है जो कि CPU Clock द्वारा synchronize होता है। इसी clock के कार्य करने की गति को हम clockspeed कहते हैं

एक Gigahertz का मतलब प्रोसेसर एक सेकंड में 10 करोड़ Instructions को Process कर सकता है।

ये जितना अधिक होगा Processor की डेटा प्रोसेस करने की क्षमता उतनी अधिक होती है।

Hyper-threading क्या होता है?

Hyper-threading से मतलब single core सीपीयू खुद को Virtualy double core दिखाएगा।

यानी यूजर द्वारा दिया गया टास्क दो है तो सिंगल कोर प्रोसेसर एक समय में एक ही कार्य कर सकता।

लेकिन वही processor HT enabled यानी hyper-threading सपोर्ट करता है तो वो दोनों कार्य एक ही समय में कर सकता है।

इसमें Physically Core दो ही हैं मगर hyper-threading के कारण 4 कोर का काम करेगा। इसी प्रकार 4 कोर यानी Quad core है तो वो Octa core का कार्य करेगा।

इस तकनीक को Intel ने विकसित किया।

इसे Intel hyper-threading कहता है, जबकि AMD के processors में इसे SMT यानी Simaltaneously Multi-threading कहते हैं।

इसे किसी road पर बने Toll plaza की तरह समझ सकते हैं। जो सिंगल लेन की बजाय बीच में Divider लगा के डबल साइड काउंटर बना दिया जाता है।

Processors कितने प्रकार के होते हैं?

Processors 5 प्रकार के होते हैं। जिनके बारे में हम नीचे जानेंगे।

Microcontroller– इनका इस्तेमाल वाशिंग मशीन, ओवन, म्यूजिक प्लेयर्स में होता है। यहाँ ये सेट टाइम के हिसाब से सिस्टम को कंट्रोल करते हैं।

Microprocessor– इनका इस्तेमाल PCs में होता है जो कि कंप्यूटर का दिमाग कहलाता है।

Embedded processor– इनका इस्तेमाल डिजिटल कैमरा, Virtual watches, mp3 players में होता है।

DSP– इनका इस्तेमाल नेटवर्क सिग्नल्स को ऑप्टिमाइज़ इत्यादि करने में या Analog तो digital कन्वर्ट करने में होता है।

Media processor- इनका इस्तेमाल image/videos को processing में किया जाता है।

Processor का इतिहास

15 नवंबर 1971 में Intel के Ted hoff, Federico Faggin, stanley Mazor के द्वारा सबसे पहला Microprocessor 4004 बनाया गया।

ये single चिप थी जो कि सारे मेन functions जैसे input/output, control, memory इसी में समाहित थे।

ईसमें 2300 transistors का उपयोग किया गया था, इसकी क्षमता 60,000 operations/second करने की थी।

ये Silicon based chip थी जो आज भी चिप बनाने की सबसे आधारभूत पदार्थों में है।

जबकि उसके अगले ही साल Intel ने 8008 नाम के प्रोसेसर का निर्माण किया।

इस तरह 1979 में मोटोरोला ने भी 68000 प्रोसेसर बनाया इसके बाद अन्य कम्पनियां भी इस क्षेत्र में शामिल हो गईं।

Processors के बनने का जितना महत्व है उतना ही महत्व सिलिकॉन (Silicon) की खोज की भी है।

Silicon की खोज Baron jons Jackob Berzelius ने 1823-1824 में की थी।

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ARM Architecture और x86 क्या है क्यों अन्य कम्पनियां processors नहीं बना पातीं हैं?

दुनिया में सिर्फ दो Intel corp. और AMD ही ऐसी मुख्य कम्पनियां हैं जो कंप्यूटर्स/लैपटॉप्स के Processors design करती हैं।

वहीं ARM (Advance RISC Machine) मोबाइल्स/लैपटॉप्स के लिए processor design करती है।

इन कंपनियों AMD+Intel (x86) व ARM के Instruction set यानी Architecture अलग-अलग हैं।

मतलब ये हुआ कि अगर कोई सॉफ्टवेयर ARM के Processors इस्तेमाल करने वाले Devices के लिए बना है तो वो X86 पर कार्य करने वाले Intel या AMD पर नहीं चलेगा।

यही कारण है कि कुछ programmes जैसे PUBG खेलने के लिए कुछ devices में Emulator का उपयोग होता है।

जो कि ARM के Instruction set को x86 के लिए translate करने का काम करता है।

आनेवाले समय में apple के लैपटॉप्स में भी ARM के designed processors आने लगेंगे।

Samsung, Mediatek, Qualcomm सभी कंपनियां ARM के डिज़ाइन किए हुए processors खरीदकर उसे अपने हिसाब से मॉडिफाई कर अपने devices में अपने अलग-अलग नामों से लगाती हैं।

Qualcomm सबसे पहले ARM से License लिया था chips को बनाने के लिए। ये Snapdragon के नाम से चिप बनाती है।

लेकिन कंपनीयां इसके कोर डिज़ाइन या Instruction set में कोई बदलाव नहीं कर सकतीं। क्योंकि ये ARM, AMD या Intel की Intellectual property है।

इनमें कुछ low levels के instruction सेट कम्पनियाँ Open-source रखती हैं। लेकिन advance version के लिए लाइसेंस जरूरी होता है।

हां बहुत सारी कंपनियां हैं जो Microprocessors बना सकती हैं जैसे Samsung, Qualcomm, mediatek यहां तक कि भारत सहित कई अन्य देश की कंपनियां भी।

लेकिन वे ARM (RISC) व Intel की (CISC) Instruction set वो नहीं ले सकतीं। इसी x86 पर लगभग सर्वाधिक कंप्यूटर्स चलते हैं।

आश्चर्य की बात है कि x86 Architecture 1978 में Intel के द्वारा विकसित किया गया था। लेकिन आज भी थोड़े बहुत Upgradation के साथ चलता है।

ये 8086 microprocessor के लिए बना था। इस वैरिएंट के कई Processors के अंतिम नंबर्स 86 थे। जो कि काफी सफल रहे थे। इसीलिए इस instruction set का नाम ही x86 पड़ गया।

x86 व ARM के Instruction सेट बिल्कुल अलग होते हैं। एक का भाषा दूसरा नहीं समझता।

अब आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि ये Instruction set यानी x86 क्या है? तो आपको बताते चलें कि ये एक निर्देश की तरह है जो प्रोसेसर को यूजर द्वारा दिए गए Command को हैंडल करना बताता है।

इसे बनाना मुश्किल नहीं है मुश्किल है कि लोग उन्हें इस्तेमाल कितना कर रहे हैं। मतलब ये की किसी भी तकनीक को कामयाबी तभी मिलेगी जब उसका यूज़र्स द्वारा Adoption उच्च होगा।

उदाहरण के लिए जैसे मैंने अपना खुद का प्रोसेसर डिज़ाइन किया लेकिन वो अन्य Devices में Compatible नहीं होगा।

क्योंकि सारे devices/platforms चाहें वो Apple हो या Android हो सभी ARM, AMD (Advanced micro devices) के डिज़ाइन पर काम करने के लिए बने हैं।

इनको इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स भी सर्वाधिक हैं। अब दूसरे प्लेटफॉर्म्स व डिज़ाइन हम लाएंगे तो उसे कोई भी डिवाइस, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर इत्यादि सपोर्ट नहीं करेगा।

सभी programmes, Processors को ध्यान में रखकर लिखे जाते हैं।

यही कारण है कि सारी कंपनियां मेहनत व मार्केटिंग करके पैसे कमाती जबकि ARM, AMD व INTEL अपने लिए कोई मार्केटिंग नहीं करतीं और उसको सभी कंपनियां मोटा पैसा देती हैं।

हालांकि ARM (Advance RISC Machines) भी रिसर्च करता रहता है उसके भी रिसर्चर्स हैं लेकिन वो खुद का advertise नहीं करता।

यहाँ ARM के RISC का fullform Reduced Instruction Set Computers है। जबकि Intel के CISC का fullform Complex Instruction Set Computers से है।

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भविष्य में कैसे Processors आने वाले हैं?

Future में हमारे पास Molybdenum disulfide (MoS2) व Carbon nanotubes के बने Chip हो सकते हैं।

आनेवाले समय में हमारे कंप्यूटर्स, गैजेट्स के लिए टेक कम्पनियां इसी तकनीक पर शोधकार्य करेंगी। जो Silicon chip को पूरी तरह replace कर देगा।

फिलहाल ये तकनीक अभी सिर्फ कुछ Researchers की टीम ने ही विकसित की है।

इसे Stanford University के researchers ने इसका demonstration IEEE के मीटिंग में पेश भी किया है। जहां इसका नाम 1-transistor-1-resistor memory cell (1T1R) दिया गया है।

फिलहाल अभी इसमें और कार्य किया जाना बाकी है।

श्रोत: IEEE Spectrum

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