What is Encryption and Decryption of Cryptography in Hindi

What is an encryption and decryption of Cryptography in hindi

आज के समय में Encryption और Decryption बहुत ही पॉपुलर हुआ है, जबकि इसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है।

फर्क बस इतना है कि पहले खत में लिखे हुए संदेशों को Encrypt किया जाता था। आज digital data का  एन्क्रिप्शन किया जाता है।

आज इसकी जरूरत और तकनीक काफी विकसित हो गई है कभी कभी तो हमे ये भी नहीं पता होता कि हम एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे Iphone, Pixel phones या अन्य नए मोबाइल्स अब Encryption फैसिलिटी के साथ आते हैं।

जब चाहें पासकोड सेट कर इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं। ये सब बेहतरीन तकनीक के कारण हो पाया। जो एकदम smoothely Run करता है कि User को पता ही नहीं होता कि वो एन्क्रिप्शन इस्तेमाल कर रहा है।

खैर, एक रोचक तथ्य ये है कि भारत मे Cryptography का श्रेय वात्स्यायन के ‘कामसूत्र’ के 64 कलाओं में एक Mlecchita vikalp अध्याय को जाता है।

जिसमे communication से संबंधित Secret writing का वर्णन है ये विधि दो Lovers के बीच गुप्त संवाद करने के तरीके के बारे में है।

तो अब रोम और मिस्त्र के क्रिप्टोग्राफ़ी इतिहास जानने से पहले अपने देश को भी याद कर लें जो सीक्रेट चीज का सीक्रेट जगह पर इस्तेमाल करना सिखाता है !!😀

चलिए अब Modern डेटा एन्क्रिप्शन तकनीक की बात करते हैं।

ये पोस्ट लिखने का ख्याल मुझे तब आया जब मैं अपने WordPress का admin password एक Experiment के तहत अपने Cpanel में Phpmyadmin से Reset कर रहा था।

वर्डप्रेस का Admin Password कैसे Reset करें

जहां मेरा Password MD5 hash code में Encrypted था।

चूंकि Hashcode encryption reverse नहीं होता है, ये Oneway encryption है क्यों कि इसमें Decrypt करने के लिए key share नहीं होती।

इसलिए आपको पहले वाला कोड असली फॉर्म में नहीं मिलता इसलिए नया बनाना पड़ता है।

वहीं से मैने सोचा कि एन्क्रिप्शन पर एक पोस्ट लिखी जाए हो सकता है की मेरे हिंदी के पाठकों को पसंद आए।

दोस्तों, एन्क्रिप्शन तकनीक इस बात पर निर्भर करती है कि इसमें किस तरह की Key का उपयोग हुआ है, Key length क्या है, encrypted data blocks की साइज क्या है।

Key size जितनी अधिक होगी Encryption उतना ही Strong होगा। जैसे 128 bit key size के मुकाबले 256 bit key साइज ज्यादा Strong codes generate करती है।

इनको वापस Decode करने में भी fast और powerful कंप्यूटिंग process की आवश्यकता होती है। वैसे आजकल के सिस्टम्स भी पावरफुल ही आते हैं।

तो चलिए इसे अलग-अलग हैडिंग्स में बांट कर  Encryption से संबंधित सभी पहलुओं पर जानकारी साझा करते हैं।

What is an Encryption?

Data को ऐसे किसी विशेष codes में बदल देना जिसे Unauthorised person उसे उसके Original form में ना Access कर पाए Encryption कहलाता है।

Data Encryption की प्रक्रिया में सामान्यतः Ciphertext का इस्तेमाल होता है।

ये प्रक्रिया Data Sender द्वारा Perform की जाती है।

यानी ये एक तरह से Plain text को Scramble (Ciphertext) में कर देने की प्रक्रिया है।

इसमें कंप्यूटर के विशेष Mathematical Algorithm का इस्तेमाल होता है। जो डेटा को अर्थहीन व अव्यवहारिक बना देता है।

What is an encryption and decryption of cryptography in hindi

जैसे हमने कोई संदेश भेजा ‘hello का अब जब इसे Encryption के पश्चात देखेंगे तो ये कुछ ऐसे होगा ‘Mtd*&%’ ! अब हम इसका कुछ नही कर सकते 😁।

Encryption की Process में एन्क्रिप्शन Key का इस्तेमाल होता है जो एक mathematical कंप्यूटर अल्गोरिथम है।

What is Decryption?

Encrypted data को वापस उसके असली form में बदल देने की प्रक्रिया Decryption कहलाती है। जो Decryption key द्वारा कम्पलीट होती है।

ये Process data Receiver द्वारा Perform की जाती है।

इसमें Ciphertext को Plain text में बदला जाता है।

Encryption की प्रक्रिया के लिए Commonly दो तरह की विधि अपनाई जाती है। जो निम्न हैं-

● Asymmetric Encryption

● Symmetric Encryption

What is an Asymmetric Encryption?

Asymmetric encryption को Public key Encryption भी कहते हैं।

इसमें एक Pair keys का इस्तेमाल होता है। एक का data को encrypt करने में जबकि दूसरी Key का डेटा decrypt करने में।

एक key को Private key, जबकि Second key को Public key कहा जाता है। Public key को share किया जाता है। Private key को Secret रखा जाता है।

Private key से Encrypted डेटा को Public key से ही Decrypt किया जा सकता है।

Asymmetric encryption SSL टेक्नोलॉजी की आधारभूत तकनीक है। जिसे हम अपने ब्लॉग्स व साइट्स पर उपयोग करते हैं।

इसके बारे में जानने के लिए ये पोस्ट पढें यहां आपको बेहतरीन जानकारी मिलेगी।

What is Symmetric Encryption?

Symmetric encryption में Single Key का इस्तेमाल दोनों कार्यों, Data को encrypt करने व Decrypt करने में किया जाता है।

Symmetric encryption की डेटा प्रोसेस की गति Faster व better performance वाली होती है Asymmetric के मुकाबले।

यही कारण है कि इस विधि का उपयोग Payment Applications, heavy data encryption इत्यादि कार्यों में अधिक होता है।

Symmetric encryption में भी दो प्रकार होते हैं जो निम्न हैं-

1- Block Algorithms
इसमें Secret key की मदद से डेटा के specific length के बिट्स Encryption के पश्चात ब्लॉक में Save होते हैं और जब तक सभी डेटा सिस्टम में नहीं आ जाते तब तक सिस्टम की memory सभी ब्लॉक्स के full होने तक डेटा को रोके रखती है।

2- Stream Algorithms
इस अल्गोरिथम में डेटा जैसे Flow होता है उसी दौरान Encrypt हो भी जाता है। इस तरह सिस्टम पर अतिरिक्त लोड नहीं पड़ता।

Examples of Symmetric Encryption algorithm 

1- AES (Advanced Encryption Standard)

इसे बनाने वाले 2 Cryptographers थे जिनका नाम Jon Daemen और Vincent Rijmen था।

2- Twofish ये विधि Counterpane Labs ने बनाई थी और इसका कभी पेटेंट नहीं हुआ ये Open-source तकनीक है।

3- DES (Data Encryption Standard)

DES को AES अल्गोरिथम के आने पर 2000 में हटा दिया गया।

DES algorithm अमेरिका में ATM machines के Pin numbers को Encrypt करने के काम आता था।

DES के ही और अधिक Secure versions लांच हुआ जिसे 3DES कहा जाता है।

Modern Cryptography

1970 में IBM ने Crypto group बनाया जो Block Cipher तकनीक थी। ये कंपनी के ग्राहकों के डेटा को एन्क्रिप्ट करती थी।

बाद में इसे US गवर्नमेंट ने अपने अधीन ले लिया और सरकारी डेटा के एन्क्रिप्शन में उपयोग करने लगी।

1997 में इस तकनीक को हैकरों ने Crack करने में सफलता पा ली जिसके बाद इसे हटा दिया गया और जैसा कि आपने ऊपर पढ़ा कि AES तकनीक ने इसकी जगह ले ली।

खैर आज के समय मे RSA (Rivest-Shamir-Adleman) सबसे Strong encryption तकनीक में से एक है। ये किसी एक का नाम नहीं बल्कि तीन लोगों का संयुक्त नाम है।

चूंकि ये बहुत ही Strong एन्क्रिप्शन तकनीक है और Asymmetric अल्गोरिथम है, इसलिए ये Slow भी है।

वहीं आजकल सबसे Common जो encryption तकनीक है वो AES है जो सबसे अधिक उपयोग में लाई जाती है और Symmetric अल्गोरिथम होने के कारण ये Fast भी है।

Network Encryption

Network encryption, इंटरनेट प्रोटोकॉल सिक्योरिटी (IPSec) द्वारा कार्यान्वित की जाती है।

ये Internet Engineering Task Force (IETF) का बनाया स्टैण्डर्ड है।

जो IP (Internet protocol) पर Private communication, व संचालन के लिए frame work का निर्माण करता है।

Network encryption थोड़ा सा Complex है, data encryption के मुकाबले।

Pro and Cons of Data Encryption

Pro- Encryption हमारे डेटा को जो एन्क्रिप्ट हो चुका है उसे सिक्योर रखता है।

Cons- लेकिन बिना एन्क्रिप्शन के डेटा को cyber attack से सुरक्षित नहीं किया सकता।

Pro- Encryption के बाद Data Securely transfer होने में मदद मिलती है।

Cons- Transfer के समय Decryption key अगर Share ना हो तो डेटा को Plaintext में नहीं बदल सकते।

Pro- Encryption के लिए सिर्फ एक Passcode सेट कर इसे आसानी से शुरू कर सकते हैं।

Cons- Encryption में computer के Processor पर extra load पड़ता है।

Android Phones के डेटा को Encrypt करने के लिए Setting में जाकर Security tab को Open करके Encrypt को सेलेक्ट करें व अपना Pin सेट कर लें।

नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ लें।
जब भी डेटा को Decrypt करना हो अपना पिन इस्तेमाल करें।

याद रखें Encrypted data को अगर पिन भूल जाएं तो डेटा डिक्रिप्ट नहीं किया जा सकता। डेटा को पूरी तरह हटाने के लिए Restore factory settings की प्रक्रिया करनी पड़ती है।

एन्क्रिप्शन का विकल्प हर कंपनी के मोबाइल इंटरफ़ेस के हिसाब से अलग अलग होता है लेकिन Security टैब के अंदर ही होता है।

दोस्तों! उम्मीद है Encryption पर हमारा ये पोस्ट जरूर पसंद आया होगा। इसे विकिपीडिया पर अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

अगर कोई सवाल या सुझाव हो तो Comment बॉक्स में मेंशन करें। धन्यवाद।

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3 COMMENTS

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