Torrent क्या है कैसे कार्य करता है इससे मूवी कैसे डाउनलोड करें?

torrent क्या है ये कैसे कार्य करता है

इस पोस्ट में हम बात करेंगे Torrent क्या है, ये कैसे काम करता है। साथ ही इसका इस्तेमाल करके हम Movies, Songs, Games व Softwares इत्यादि को कैसे फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि इन्टरनेट पर सभी चीजें जैसे शेयरिंग, एक्सेसींग, डाउनलोडिंग इत्यादि एक निश्चित प्रोटोकॉल के तहत होती हैं।

जैसे फ़ाइल ट्रांसफर के लिए FTP (File transfer protocol), network कम्युनिकेश के लिए TCP (Transmission control protocol), webservers व browsers के  file sharing के लिए http (Hyper text transfer protocol)

उसी तरह Torrent भी एक प्रोटोकॉल है जिसे bit torrent कहते हैं। ये torrent प्रोटोकॉल के तहत कार्य करता है। इसमें किसी वेबसर्वर की कोई भूमिका नहीं होती है।

आजकल इसका इस्तेमाल Pirated games, softwares इत्यादि के downloading में अधिक हो रहा है।

यही कारण है कि कई देश की सरकारें इसपर समय-समय पर प्रतिबंध लगाने की सोचती हैं व कुछ देशों में ये पहले से ही बैन है।

हालांकि लोग इसे फिर भी उपयोग करने का तरीका ढूंढ ही लेते हैं जैसे VPN ( Virtual Private network) इसमें सबसे मुख्य भूमिका निभाता है।

तो चलिए इस टॉपिक पर हम अलग अलग हैडिंग्स के अंतर्गत विस्तार से जानते हैं।

Torrent क्या है?

Torrent एक PeertoPeer based file sharing technology है। इससे हम जब भी कोई डेटा डाऊनलोड करते हैं तो वो Server based ना होकर Peer-to-peer based  होती है।

यानी इसमें files वेबसाइट्स वगैरह की तरह Webserver पर Stored नहीं होतीं।

इसकी file sharing, bit torrent प्रोटोकॉल पर आधारित होती है। जो एक तरह का software ही होता है।

ये डाउनलोड होने वाली फ़ाइल को कई छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट देता है।

इस तरह अगर डाउनलोड के समय कहीं किसी कारणवश इन्टरनेट कनेक्शन बाधित भी हो जाए तो आपको डाउनलोड हो चुके डेटा को दुबारा डाउनलोड करने की जरूरत नहीं होती।

नीचे हम दूसरे हैडिंग्स के अंतर्गत इसके कार्य करने के तरीकों के बारे में विस्तार से जानेंगे।

इस प्रोटोकॉल के जनक का नाम Bram Cohen है जो 2001 में इसे ईजाद किया व 2004 में Navin Ashwin के साथ मिलकर एक कंपनी (Bit Torrent) स्थापित किया।

नवीन अश्विन अब भी इस कंपनी के CEO हैं (2019) जिसका नाम अब इसे परिगृहीत करने वाली कंपनी के नाम पर TRON  हो गया है।

Torrent कैसे कार्य करता है?

BitTorrent एक बहुत ही बेहतरीन प्रोटोकॉल है। इसको हम इसतरह समझेंगे मानलीजिए मैं कोई चीज torrent hosting साइट से डाउनलोड करना चाहता हूँ।

वही चीज किसी के पास है जो फ्री में उसे दुनिया के कोने कोने में पहुँचाना चाहता है। तो वो इसे Torrenting करेगा।

इसके लिए वो Torrent hosting sites पर जाकर एक torrent Create करेगा। torrent file एक बहुत ही छोटी फ़ाइल होती है जो कुछ kb की होती है।

जब मैं उस torrent file को डाउनलोड करूंगा तो वो मेरे Torrent client (Bittorrent, utorrent etc.) से जुड़ जाएगा।

अब ये connection इंटरनेट के माध्यम से torrent Swarm से कनेक्ट होगा। यहां पर Tracker (.torrent file) requested file को सभी Users या Seeders के फ़ाइल से match करेगा।

वो ये पता लगाएगा की ये फ़ाइल कहां कहां है और कितने प्रतिशत है।

अगर फ़ाइल मैच हो गई तो वो मुझे उन सभी Clients से Connect कर देगा जिनके पास भी मेरी डाउनलोड करने वाली फ़ाइल है।

अब मुझे वो फ़ाइल उन सभी जगहों से मिलनी शुरू हो जाएगी। चूंकि मैं अभी अभी Connect हुआ हूँ और वो फ़ाइल मुझे 100% नहीं मिली है तो मैं Leecher कहलाऊंगा।

वो सभी जो torrent को share करने जैसी प्रक्रिया में शामिल हैं वो Peer कहलाते हैं।

खैर, अब मानलीजिए 1 या 10 यूजर और कनेक्ट हो गए जिन्हें वो फ़ाइल चाहिए तो वो फ़ाइल अब सबके अलावा मेरे से भी उन्हें मिलनी शुरू हो जाएगी। इसतरह एक ही फ़ाइल के कई Source बनते जाएंगे।

इन सभी को मिलाकर torrent एक network जैसा Create कर देता है इसी नेटवर्क को Swarm कहते हैं। कोई भी User बिना Swarm से जुड़े कुछ भी डाउनलोड नहीं कर सकता। ये ठीक उसी तरह है जैसे इंटरनेट।

अब मानलीजिए मुझे वो फ़ाइल 100% मिल गई यानी डाउनलोड हो गई और मैं उसे upload करते जा रहा हूँ तो मैं अब Seeder कहलाऊंगा।

अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि कुछ डेटा डाउनलोड होते ही वापस अपलोड होना कैसे शुरू कर सकते हैं, व क्यों ये लाखों लोगों में होते हुए भी बड़ी बड़ी फाइल्स को भी तेजी से लोड कर देता है।

तो यहीं काम आती है BitTorrent Protocol की बेहतरीन टेक्नोलॉजी। जी हां, आपने शुरू में पढ़ा था कि torrent से फ़ाइल टुकड़ों में डाउनलोड होती है। एक बात और, इसमें अपलोड करने व Speed choose करने का ऑप्शन होता है।

मतलब ये की अगर फ़ाइल 1 GB की है तो वो कई सौ टुकड़ों में करके लोड होती है।

इसके पीछे कारण ये है कि जब फ़ाइल अपलोड होती है तो उसी तरह जितने भी कंप्यूटर्स Swarm से जुड़े हैं वो अपलोड कर रहे हैं तो सबसे छोटे छोटे टुकड़ों को लेकर ये फ़ाइल आपके सिस्टम में डाउनलोड करती है।

मानलीजिये किसी मे वो फ़ाइल 10 kb की है किसी मे अगले पार्ट की 1 mb की लोड हो चुकी है तो किसी तीसरे सिस्टम में वो उससे आगे की कुछ kb या mb लोड हो चुकी है।

तो सबसे ये छोटे छोटे टुकड़ों को लेकर आपके सिस्टम में डालता जाता है यानी बड़ी साइज की फ़ाइल भी आसानी से इसीलिये लोड हो जाती है कि आप एक जगह से नहीं बल्कि कई जगहों से फ़ाइल डाउनलोड कर रहे होते हैं।

टोरेंट आपकी फ़ाइल डाउनलोड हो जाने पर Combine करके आपकेे सिस्टम में Save कर देता है।

Tracker क्या है?

जब हम किसी फ़ाइल को download करने के लिए .torrent फ़ाइल डाउनलोड करते हैं वही Tracker का काम करता है। इसी में फ़ाइल से जुड़ी सभी information होती है।

Tracker एक server software होता है। ये Clients के IP Addresses को अन्य clients के बीच share करता है।

Tracker यूजर के Torrent client को Leechers व seeders जिनके पास वो फ़ाइल है उसकी लिस्ट प्रोवाइड करता है।

Client ये काम .torrent के torrent hash को calculate कर पता लगाता है कि ये फ़ाइल वही है जो यूजर चाहता है।

इसके बाद Torrent client, tracker से Seeders, Leechers से उनके IP address प्राप्त करता है उसके बाद download की Process start होती है।

Tracker का काम Clients से Connect होना व फ़ाइल को अलग अलग Seeders से लेकर सही Leechers के पास पहुंचाना होता है।

Torrent से Movie कैसे Download करें?

इसे हम व्यवहारिक रूप में ऐसे समझते हैं जैसे मानलीजिए मुझे torrent से अपने मोबाईल/पीसी पर कोई मूवी डाउनलोड करनी है।

तो मैं इसके लिए सीधे पहले Torrent client लोड करूंगा। इसके लिए मैं सीधे playstore पर जाऊंगा।

Playstore से मैं कोई torrent एप्प डाउनलोड कर इनस्टॉल करूंगा, जैसे BitTorrent, utorrent इत्यादि।
इसके बाद मैं अपने किसी भी ब्राउज़र के अंदर जाके torrents hosting साइट्स ओपन करूंगा। जैसे Legittorrents, Piratebay इत्यादि।

वहां मैं कोई movie सर्च करूँगा और उस पर क्लिक कर दूंगा। यहां मुझे दो तरह का लिंक मिलेगा 1- नार्मल डाउनलोड जिसमे .torrent file मिलेगी 2- Magnet link

1-नार्मल डाउनलोड -जब आप डाउनलोड करेंगे तो वो .torrent फ़ाइल होगी। अब इसे आप अपने फ़ाइल मैनेजर से ओपन करिए। ओपन करने के बाद इसे Install कर लें।

जब इसे ओपन करेंगे तो वो सीधे आपके डाउनलोड किए गए torrent क्लाइंट के App में खुल जाएगी।

यहां आपको फ़ाइल से संबंधित सभी details देखने को मिलेगी।

2- Magnet link– इसके लिए आपको सिर्फ magnet link को copy कर लेना है और अपने torrent client को ओपन कर उसमें link add कर डाउनलोड के लिए location चुनकर OK कर देना है।

थोड़े ही देर में downloading शुरू हो जाएगी।

डाउनलोड स्टार्ट होने पर ऊपर आपको Leechers व Seeders की संख्या देखने को मिलेगा। अगर Seeders की संख्या Leechers के मुकाबले काफी कम है तो वो Healthy torrent नहीं होता।

इसमें आपको speed कम मिलेगी। क्यूँकी Download करने वालों की संख्या अपलोड करनेवालों से बहुत अधिक है।

Magnet Link क्या है?

Magnet link दरअसल एक hyperlink होता है। Magnet link torrent client को फ़ाइल डाऊनलोड स्टार्ट करने के लिए जरूरी information देता है।

Magnet link DHT यानी Distributed hash table के आधार पर कार्य करता है। जिसमे nodes होते हैं जो फ़ाइल के डिटेल्स को डायरेक्ट seeders से मैच करते हैं।

Magnet link में Tracker की आवश्यकता नहीं होती। क्यों कि ये DHT का उपयोग करता है।

इसमें Torrent client सीधे Seeders या Peers से फ़ाइल की डिटेल्स मैच कर Download start कर देता है। जबकी torrent downloading में Torrent client .torrent फ़ाइल पर निर्भर होता है।

वैसे torrent downloading व magnet link से downloading में सिर्फ एक या दो अधिक क्लिक का अंतर है। बाकी कुछ अलग नहीं है।

आप चाहें तो magnet link को अपने दोस्तों से whatsapp या अन्य माध्यम से भी शेयर कर सकते हैं ताकि वो भी फ़ाइल को डाउनलोड कर सकें।

Torrent file कैसे बनाएं?
इस प्रक्रिया को आप wikihow पर इसके अंग्रेजी कॉलम में पढ़ सकते हैं। इसे पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

Legal torrent sites कौन सी हैं?

यहां हम कुछ Legal torrent sites की list दे रहे हैं आप चाहें तो विजिट कर सकते हैं।

1- Legit torrents

2- Internet Archive

3- Vodo

4- BitLove

5- Game updates

हालांकि सभी लीगल torrent sites पर सभी नई फाइल्स वगैरह मिलना मुश्किल होता है कॉपीराइट इश्यूज के कारण।

इसलिए आपको torrent sites पर पूर्ण रूप से भरोसा नहीं करनी चाहिए। जबकि अन्य illegal साइट्स पर Malware files, phishing वगैरह cyber fraud की भी जोखिम है। इसलिए सावधानी बरतें।

क्योंकि Peer-to-peer और distributed ecosystem होने के कारण इसपर Ban लगाना काफी मुश्किल है।

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2 COMMENTS

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