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Dark web व Deep web क्या है इसे Tor browser से कैसे Access करें

What is Dark web and Deep web and how to access it safety via tor browser.

इंटरनेट को 3 हिस्सों में बांटा गया है Dark web, Deep web व Surface web इस पोस्ट में हम इनके बारे में विस्तार से जानेंगे साथ ही tor ब्राउज़र के बारे में भी चर्चा करेंगे।

जब 1960 के दशक में Internet आया तो अपने साथ अनंत संभावनाओं के साथ-साथ कुछ परेशानियां भी लाया।

इसी तरह 1970 के दशक में Dark web आया तो ये बहुत सी परेशानियां लाया। जो Secret रूप से U.S Gov. के सैनिकों व उनके Spies  यानी गुप्तचरों के मध्य Communication के लिए बना था।

जबकि 1990 के मध्य में TOR ब्राउज़र आया जो  Anonymous browsing (Tor network) के लिए एक समाधान लाया और Dark web के लिए मुख्य ब्राउज़र बना।

हालांकि इंटरनेट भी Communication के लिए बना था। लेकिन ये उतना सुरक्षित नहीं था। आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है जिसके फलस्वरूप Dark web, VPN इत्यादि अस्तित्व में आए।

इस पोस्ट में हम Surface web, Dark web, Deep web के बारे में अच्छी तरह से जानेंगे। साथ ही इन्हें सुरक्षित तरीके से कैसे Access करें ये भी जानेंगे।

Dark web क्या है?

Dark web Internet का एक हिस्सा है जो Surface web पर Index नहीं है।

इंटरनेट पर जो Contents Index होते हैं वो Surface web है। जो Contents Index नहीं होते वो Deep web है लेकिन जो Index भी न हो और बिना किसी Special encryption सॉफ्टवेयर के Access भी ना हो वो Dark web है।

Dark web पर गूगल की तरह कोई भी Index system नहीं है। जहां आप कोई भी सर्च करें व रिजल्ट में आपको कई तरह का ऑप्शन दे। इसीलिए डार्क वेब के अधिकांश साइटों का एड्रेस किसी को पता नहीं रहता है।

ये Legal है लेकिन यहाँ illegal कार्य अधिक होते हैं। इसे Access करने के लिए Special software व Authorization की आवश्यकता होती है।

हालांकि कुछ मायनों में dark web या dark net deep web का ही हिस्सा है।

दोस्तों, Dark net या dark web एक ही चीज है। ये कोई ऐसा नहीं है जिसे आम इंसान बना भी नही सकता। इन साइट्स में tor network (बहुसंख्य VPN’s के समान नेटवर्क) उपयोग किए जाते हैं।

इसीलिए इनपर विजिट करने वाले कि IP (Internet Protocol) एड्रेस निरंतर बदलता रहती है।

जैसा कि आपको पता होगा कि इंटरनेट का हम जैसे सामान्य यूजर सिर्फ 10% इस्तेमाल करता है बाकी का 90% dark web+deep web या Dark net है।

Dark web को access करने के लिए हमे विशेष सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। जिसे Encryption के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। ये Anonymous browsing के लिए जरूरी है।

Dark web को और इसके Accessing tool या browser TOR browser को भी U.S सेना के Engineers ने बनाया था।

लेकिन कुछ Developers ने इसके secure browsing का गलत इस्तेमाल किया और नतीजा Smuggling, Child Pornography, Drugs, Weapon trading इत्यादि Illegal कार्य के रूप में सामने आया।

आज TOR के अलावा I2P, freenet, जैसे browsers भी हैं जो Dark web को आम users लिए accessibility देते हैं।

Dark net की साइट्स के नाम का एक्सटेंशन (TLD- Top level domain) .onion होता है। जैसे सामान्य साइट्स के नाम के बाद .com, .net इत्यादि होता है वैसे ही इनमे .onion होता है। जैसे- eajwlpvm3z2lcsma76.onion.

ऐसा नहीं है कि डार्क वेब पर सभी illegal activities ही होती हैं। यहां पर कुछ अच्छी साइट्स भी हैं जो यूज़र्स को Anonymous browsing की सुविधा देती हैं।

उदाहरण के लिए facebook ने खुद भी .onion पर (www.facebookcorewwi) फेसबुक लांच किया है जो सिर्फ tor browser के अंदर ही खुलेगा।

लेकिन कुल मिलाकर बात यहीं आती है कि अपना Surface web सबसे अच्छा है। उदाहरण के लिए अगर आप अपने Chrome browser से किसी Malicious site पर गलती से भी visit करते हैं तो Chrome हमें पहले ही Warn यानी चेतावनी देता है।

जबकि डार्कवेब पर ऐसा नहीं है। यहां पर चेतावनी आती भी है तो हैक हो जाने की।

Dark net पर Onion routing के कारण साइट्स की latency अधिक होती है। इसके बाद visitors को खुद hack होने का खतरा भी अधिक होता है।

Dark web को Safely कैसे Access करें?

कभी भी dark net को access करने से पहले कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए जो सुरक्षा के लिहाज से जरुरी हैं।

Tor ब्राउज़र मोबाइल के लिए अभी उपलब्ध नहीं है, हां Orbot एप्प है जो tor नेटवर्क के थ्रू आपके मोबाइल के ट्रैफिक को रन करता है।

हमेशा याद रखें Tor ब्राउज़र सिर्फ आपके द्वारा किए गए रिक्वेस्ट को Secure करता है और पहचान की, ना की आपको हैक होने से बचाता है। इसलिए नीचे दिए गए टिप्स को फॉलो करें —

• सबसे पहले कोई अच्छा सा VPN (Virtual Private Network) सर्विस एक्टिवेट कर लें।

• Tor browser को हमेशा ऑफिसियल साइट https://www.torproject.org से ही डाउनलोड करें।

• Dark web पर कभी भी अपना Regular email id नहीं डालें। temp-mail.org पर जाकर टेम्पोररी email id बना सकते हैं जो कुछ मिनट बाद खुद ही डिस्ट्रॉय हो जाता है।

• Phone/Computer/Apps सॉफ्टवेयर्स को हमेशा Updated रखें।

• किसी भी तरह का Online transaction ना करें।

• अपना सोशल मीडिया एकाउंट या किसी भी तरह का Personal detail ना enter करें।

• अपने सिस्टम के कैमरे को ढ़क लें।

उपर्युक्त सावधानीयों के साथ आप tor इंस्टॉल करने के पश्चात dark net का इस्तेमाल कर सकते हैं। सुझाव यही है कि सिर्फ इसे एक तरह के अनुभव के लिए लें, आदत ना बनाएं।

TOR ब्राउज़र क्या है ये कैसे कार्य करता है?

TOR ब्राउज़र का पूरा नाम ‘The onion router’ है। ये Open-source Encryption सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है।

ये User के ट्रैफिक को Secure रूप से tor नेटवर्क पर रन करता है।

इसे United states के Naval research laboratory के गणितज्ञ (Mathematician) Paul Syverson व कम्प्यूटर वैज्ञानिक Michael G. Reed और David Goldschlag ने बनाया था।

इसपर आप नार्मल web browsing भी कर सकते हैं लेकिन ये smoothly run नहीं करता है। क्यों कि tor network javascript को disable कर देता है और आपको Google में log in होने में भी दिक्कत आती है।

ऐसा इसलिए कि जब आप गूगल में login होते हो तो ये आपको दूसरे देश का IP address देता है जो आपके पहले से logged in location से अलग होता है। इतनी जल्दी लम्बा ट्रेवल सम्भव नहीं है। ये बात गूगल को suspicion में डालती है।

आज ये दुनिया भर में फैले Tor Volunteers के माध्यम से रन किया जाता है और आज सबके लिए उपलब्ध है।

जबकि शुरुआती मकसद इसका सिर्फ U.S आर्मी के secure communication के लिए था।

चूंकि ये tor network का इस्तेमाल करता है इसलिए ये speed के मामले में थोड़ा slow होता है।

Tor कैसे कार्य करता है, Tor nodes क्या होते हैं?

जब कोई User/Traffic Tor network से Connect होता है तो उसे Tor network का Entry node कहते हैं। यहां यूजर का डेटा कई पैकेट्स में और कई encryption layer में होता है।

इसके बाद ये डेटा अलग-अलग country के IP (Servers)से connect होते हुए travel करता है जिसे Nodes कहते हैं। हर नोड्स डेटा को रिसीव कर उसे Relay करता जाता है।

एक अनुमान के मुताबिक 7000 nodes (Servers) हैं tor नेटवर्क में। जो इसके Volunteers रन करते हैं।

हर node आपके एक स्टेप Previous IP को देख सकता है। फाइनली आपका data packet Exit node पर पहुंचता है जहां डेटा का encryption layer हट जाता है। यहाँ आपकी सर्च उस site पर पहुंच जाती है जहां आपको जाना है।

वापसी में यही प्रक्रिया दुहराई जाती है।

Tor browser के नुकसान (Downside of Tor)

• कई बार ऐसा भी होता है कि इसे Network Administrators ब्लॉक कर देते हैं।

• इसे firewalls भी ब्लॉक कर देते हैं।

• जब भी कोई यूजर tor ब्राउज़र access करता है Tor के Entry node को उसके ISP (Internet Service Provider) को पता चल जाता है। इसलिए VPN पहले इस्तेमाल करना होता है।

• ब्राउज़िंग speed slow होती है।

• Tor पर आप ठीक से streaming नहीं कर सकते या कोई भी ऐसी एक्टिविटी नहीं कर सकते जिसमे बैंडविड्थ अधिक लगती हो।

• Tor सभी Devices में नहीं चल सकता है। यानी ये device compatability में बेहतर नहीं है।

• Tor सिर्फ User के Request को encrypt करता है।

VPN व Tor नेटवर्क में क्या अंतर है?

• VPNs आपके पूरे traffic को Encrypt करते हैं, जबकि tor नेटवर्क सिर्फ आपके Request को Encrypt करता है।

• VPN प्राइवेट रूप में ऑपरेटेड servers का इस्तेमाल करते हैं जबकि Tor volunteers operated servers का इस्तेमाल करता है।

• VPN की ब्राउज़िंग स्पीड tor के मुकाबले बेहतर होती है।

• VPN एक Centralized सर्विस है जबकि tor का कोई fix server नहीं है और ये decentralized है।

• VPNs सर्विस फ्री नहीं है, जबकि tor बिल्कुल free है।

• VPN की Encryption थोड़ी कमजोर होती है tor के मुकाबले।

Deep web क्या है?

Internet पर हर वो पेज जिसे Access करने के लिए हमें Log in होने की आवश्यकता होती है और जो सर्च इंजन में इंडेक्स नहीं होते वो Deep web है।

उदाहरण के लिए बैंकों के साइट पर लोग इन होना या किसी भी ऑनलाइन एक्टिविटी जिसमे यूज़रनेम व पासवर्ड की आवश्यकता होती है वो सभी Deep web का हिस्सा हैं।

लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि Deep web के अंतर्गत Dark web भी आता है।

Deep web को hidden web, Invisible web इत्यादि नामों से जाना जाता है।

जो भी हम इंटरनेट पर ऑनलाइन ब्राउज़िंग करने पर रिजल्ट्स दिखते हैं उसके उल्टे dark web पर हमें लॉगिन, sign up करना पड़ता है।

इसी Deep web को किसी अन्य  के द्वारा access हासिल हो जाने पर उसे हम हैकिंग का नाम भी देते हैं।

क्योंकि हैकर उन पेजेज के एक्सेस हासिल कर लेते हैं जिन्हें वेब ओनर अपने robots.txt file में search engines (web crawlers) को उन पेजेज को Index करने की परमिशन नहीं दिए होते हैं।

चूंकि Deep web में dark वेब व Surface web दोनों का ही हिस्सा है इसलिए ये इंटरनेट का सबसे बड़ा हिस्सा है जिसे आम लोग एक्सेस नहीं करते।

Surface web क्या है?

Surface web World-wide-web का हिस्सा है जो सभी लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध है और इंटरनेट पर (गूगल में) Indexed है। इसे Lightnet, clear web या Visible web भी कहते हैं।

उदाहरण के लिए, ये आर्टिकल आप पढ़ रहे हैं मतलब आप Surface web इस्तेमाल कर रहे हैं। मतलब, जो सामान्य तौर पर हम इंटरनेट इस्तेमाल करते हैं जैसे गूगल, bing इत्यादि वो surface web कहलाते हैं।

Surface web पर कोई भी गैरकानूनी गतिविधियों पर आसानी से लगाम लगाई जा सकती है जो मानव-समाज के लिए जरूरी है।

जबकि डार्क नेट पर ऐसा थोड़ा असम्भव है इसीलिए वहां पर गैरकानूनी गतिविधियों की भरमार है। हालांकि Surface web पूरे इंटरनेट का सिर्फ 5% से 10% है।

अंत मे हम यही कहेंगे कि हर चीज की जानकारी रखनी अच्छी बात है लेकिन बचाव सबसे अच्छी चीज है अतः डार्क नेट का इस्तेमाल न ही करें तो बेहतर है। 

दोस्तों उम्मीद है आपको हमारी ये पोस्ट अच्छी लगी होगी। इसे अपने सोशल मीडिया माध्यमों से शेयर जरूर करें ताकि अन्य लोगों की भी ज्ञानवृद्धि हो। अगर आपके पास कोई सवाल या सुझाव हो तो कमेंट में हम से अवश्य पूछें, हम जितनी जल्दी हो सके जवाब देने की कोशिश करेंगे। धन्यवाद।

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3 COMMENTS

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