Url Shortening क्या है इसका इतिहास व टॉप Earning साइट्स

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Url शॉर्टेनिंग क्या है इसका इतिहास व टॉप earning साइट्स।

Url shortening क्या है इसका इतिहास व टॉप Earning साइट्स के इस पोस्ट में हम टॉपिक के बारे में गहराई से जानेंगे। बीते कुछ महीनों में Url shortener का प्रचलन और इसका प्रचार-प्रसार काफी बढ़ा है।

दोस्तों Url का पूरा नाम Uniform resource locator होता है। ये किसी भी वेबपेज का एड्रेस होता है। शॉर्टेनर से अभिप्राय छोटा करना होता है।

इस तरह इसका मतलब होता है किसी भी बड़े यूआरएल को छोटे रूप में रूपांतरित कर देना।

जैसे किसी पेज का यूआरएल,
http://hindijet.com/blogger-custom-domain ” है तो इसका शार्ट यूआरएल होगा,
https://bit.ly/2HfNmst “.
इस तरह यूआरएल शॉर्टेनर काम करता है।

How shortened Url (s) works

यूआरएल किसी न किसी सर्वर से जुड़े होते हैं और उनके डेटाबेस में Save होते हैं।

ये एक कंप्यूटर के प्रोग्राम होते हैं। जब भी कोई  शार्टलिंक तैयार होता है तो वो और उससे संबंधित असली लिंक एक database रजिस्ट्री में सेव हो जाते हैं।
जब भी कोई रिक्वेस्ट शार्ट लिंक के लिए आता है, तो वो उस रिक्वेस्ट को Associated लिंक पर redirect कर देता है।

अगर एसोसिएटेड लिंक नहीं है तो error का मैसेज बताता है।

यानी ये आपके द्वारा शार्ट किए गए यूआरएल को आपके original वेबपेज पर redirect करता है।

History of Url shortening

Url shortening का इतिहास बहुत पुराना तो नहीं है लेकिन इसकी शुरुआत 2002 में TinyUrl वेबसाइट के लॉन्चिंग के समय से है।

ये पहली वेबसाइट है जो यूआरएल शॉर्टेनिंग तकनीक को हमसे Introduce कराया।

आज twitter से wordpress तक सबने अपनी खुद की यूआरएल शॉर्टेनिंग सर्विस बना ली है।

आज जब भी कोई ब्लॉगर पोस्ट लिखता है तो हैडिंग के नीचे उसे Permalink के पास Get shortlink का विकल्प आता है जो आपको wp.me से शुरू होनेवाला शॉर्ट लिंक उपलब्ध कराता है।

इसके बाद तो बहुत सारी वेबसाइट्स आईं यहां तक कि गूगल भी अपनी खुद की goo.gl के नाम से साइट लांच किया लेकिन ये 2018-2019 के बीच शुरू भी हुई और अब इसे बंद भी कर दिया गया।

हालांकि इसके द्वारा शार्ट किए गए यूआरएल हमेशा काम करते रहेंगे।

Top Url shortening websites

इस क्रम में यूं तो बहुत सारी वेबसाइट्स हैं लेकिन जो काफी समय से स्थाई और जिनके शार्ट किए गए यूआरएल कभी fail नहीं हुए उनकी लिस्ट हम यहां दे रहे हैं।

bitly

Most popular Url shortening websites में bitly का नाम सबसे ऊपर आता है।
इसकी सर्विस भी काफी सिंपल और अच्छी है। कोई भी इसकी साइट को विजिट कर सीधे इसके सर्च बॉक्स में अपने Long url को पेस्ट कर नीचे shorten link पर क्लिक कर अपने यूआरएल को शार्ट फॉर्म में कॉपी कर सकता है।

हालांकि ये Paid सर्विस भी ऑफर करता है। जिसमे registerd members को अपने लिंक्स Customize करने के options मिलते हैं। इसके साथ ही वो compaign भी लांच कर सकता है।

TinyURL

Url shortening तकनीक के US में Patent रजिस्टर्ड हो जाने के बाद TinyURL ही वो पहली वेबसाइट थी जो हमे ये तकनीक उपलब्ध कराई।

इसकी सर्विस भी बहुत अच्छी है।

AdF.ly

AdF.ly से आप सिर्फ अपने यूआरएल को शार्ट ही नहीं बल्कि शार्ट किए गए यूआरएल से पैसे भी बना सकते हैं।

ये निर्भर करता है कि आपके शार्ट किए गए यूआरएल पर sharing करने पर कितने clicks आ रहे हैं।
आप अपने यूआरएल को इस साइट पर जाके sign in करें और शार्ट किए यूआरएल को सोशल मीडिया या चैटिंग एप्स के माध्यम से शेयर करें।

Mcaf.ee

ये नाम आपको जाना पहचाना लग सकता है क्यों कि ये कंपनी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर से संबंधित चीजें बनाती है।
अब ये यूआरएल शॉर्टनेर के बिज़नेस में भी आ गई है। आप इसे सीधे अपने क्रोम, firefox के ब्राउज़र में भी इनस्टॉल कर सकते हैं।

जहां आप जब चाहें सिर्फ अपने लिंक्स को कॉपी-पेस्ट करके शार्ट कर सकते हैं।

Ow.ly

ये साइट भी बहुत खास है। जो अपने hootsuite डैशबोर्ड के लिए फेमस है। इसके माध्यम से भी आप अपने यूआरएल को शार्ट करने के अलावा उसके परफॉरमेंस से संबंधित डेटा को इसके डैशबोर्ड पर चेक कर सकते हैं।

ये भी फ्री के अलावा पेड सर्विस भी उपलब्ध कराता है।

Buff.ly

इस साइट की सबसे खास बात ये है कि इस साइट पर आप अपने shortened url(s) को अपने तय समय के लिए Scheduled कर सकते हैं।

यानी आप किसी स्पेसिफिक टाइम पर लिंक पब्लिश करना चाहते हैं तो उसका समय निर्धारित कर सकते है।  पोस्ट उस समय पर अपने आप सोशल मीडिया इत्यादि पर पब्लिश हो जाएगी।

इसके कुछ पेड फीचर्स भी हैं जो $15 से लेकर ,$399 तक के हैं।

How to Earn from Url shortenings

दोस्तों दुनिया Earnings के पीछे या यूं कहिए कि पैसे के पीछे भाग रही है। इसलिए हम भी इस पोस्ट के अंतर्गत यूआरएल शॉर्टनेर के माध्यम से पैसे कमाने के बारे में थोड़ी बात करेंगे।

दोस्तों जो भी लिंक हम यूआरएल शॉर्टनेर वेबसाइट्स के माध्यम से Generate करते हैं उसे शेयर करने पर जितने लोग उस लिंक को क्लिक करते हैं उसके हमे पैसे मिलते हैं।

होता ये है कि जब उस लिंक पर क्लिक किया जाता है तो यूट्यूब की भांति साइट खुलने से पहले 5 सेकंड का Ad आता है।
इसी एड को देखने के कंपनियां हमे पैसे देती हैं।

ये लगभग 2 से 5 डॉलर प्रति 1000 क्लिक्स के हिसाब से भुगतान करती हैं।

इन लिंक्स को आप सोशल मीडिया प्लेटफार्म या विभिन्न चैटिंग ऍप्स पर शेयर कर सकते हैं।

आपके विजिटर अगर US, Canada इत्यादि विकसित देशों से हैं तो आपके क्लिक के रेट भी अधिक होते हैं।

यानी जितनी अधिक क्लिक्स उतनी अधिक Money । तो चलिए शुरू करते हैं।

MiniURL.io

पेआउट के मामले में ये साइट बहुत ही बढ़िया है। आप सिम्पली इसकी साइट पर 2 मिनट के अंदर Sign up कर लिंक्स शार्ट करना शुरू कर सकते हैं।

ये साइट आपको प्रति 10,000 पर 250 डॉलर का भुगतान करती है। जो Paypal या डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के माध्यम से भारत मे पा सकते हैं। 

आप इससे minimum $5 होने पर पेआउट कर सकते हैं।

adF.ly

ये साइट मार्केट में पुरानी और काफी भरोसेमंद है, जो आपके लिंक्स को ट्रैक करने कि सुविधा उपलब्ध कराती है।

ये भी और साइट्स की तरह  links sharing पर Clicks के पैसे देती है।

Shorte.st

ये भी बहुत ही लोकप्रिय वेबसाइट है। इसका इंटरफ़ेस बहुत ही Userfriendly है। ये $5 से $15 तक 1000 व्यूज के देती है जो बहुत ही अच्छी बात है।

आप simply इसकी साइट पर जाकर sign up करके शोर्ट्स लिंक्स create कर उन्हें Monetize कर सकते हैं।

Linkshrink

ये साइट आपको इंडिया में बैंक ट्रांसफर और Paypal के अलावा Paytm के माध्यम से भी आपके Earnings को भेजती है।

Clicksfly
ये इंडिया बेस्ड साइट भी बहुत बढ़िया कमाने का मौका देती है। इसकी Paying सबसे ज्यादा है, यानी ये इस फील्ड में सबसे अधिक पैसे देती है।

दोस्तो और भी तमाम साइटें हैं और कुछ हर रोज आ रही हैं। इसलिए सभी के बारे में बता पाना असंभव है।

Pros and Cons of shortened urls

हर चीज के दो पहलू होते हैं और Url shortening के मामले में भी ऐसा ही है। चलिए इनके कुछ अच्छे और कुछ बुरे पहलू के बारे में भी जान लेते हैं।

◆ शॉर्टेनिंग सर्विस का फायदा हैकर्स और spammers अपने इन्फेक्टेड फाइल्स को ट्रांसमिट करने के लिए भी कर सकते हैं। जो यूज़र्स को शार्ट लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचने पर मजबूर करता है।

◆ कुछ ही वर्ष पहले TinyUrlTinyUrl साइट को सऊदी अरबिया ने बंद कर दिया था कारण Spayware और Spamming था।

◆ यूआरएल शार्ट हो जाने पर उसकी वास्तविक आइडेंटिटी जान पाना मुश्किल हो जाता है। इस तरह से कुछ यूजर short किये लिंक पर क्लिक नहीं करते।

◆ शार्ट Urls कई बार काम करना बंद भी कर देते हैं। ये निर्भर करता है Url शॉर्टेनिंग कंपनी के ऊपर। इस तरह वो पेज रैंकिंग में नीचे चला जाता है।

◆ शॉर्टेड लिंक छोटा और याद करने में आसान हो जाता है, लेकिन शॉर्टेड लिंक्स को कुछ सोशल मीडिया साइट्स बैन कर देती हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर शेयर करने से पहले जांच लें।

◆ अगर आप Earnings को लेकर सिरियस हैं तो आपको शॉर्टलिंक्स के अलावा अन्य सोर्सेज पर भी ध्यान देना चाहिए।

 

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