What is share market in hindi-शेयर मार्केट की जानकारी

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What is share market in hindi/शेयर मार्केट क्या है

What is share market in hindi के इस पोस्ट में हम शेयर मार्केट के हर पहलू जैसे-share market basics, Mutual funds, IPO इत्यादि के बारे में गहराई से जानेंगे।

किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में स्टॉक मार्केट का सबसे महत्वपूर्ण हाथ होता है। अगर स्टॉक मार्केट क्रैश होता है तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

अगर स्टॉक मार्केट में लगे पैसों को Investors निकालने लगें तो भी देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ता है।

शेयर मार्केट एक बाजार है। जहां Stocks को  exchange किया जाता है। शेयर मार्केट, स्टॉक मार्केट या स्टॉक एक्सचेंज सामान्य रूप से एक ही चीज हैं।

स्टॉक एक्सचेंज, खरीददार और विक्रेता के मध्य एक बाजार का कार्य करता है। जहां क्रेता और विक्रेता स्टॉक्स की खरीदी बेची करते हैं। जबकि share Broker आपको स्टॉक मार्केट में व्यापार करने के लिए स्टॉक मार्केट पर रजिस्टर करता है।

आप जब भी किसी कम्पनी के शेयर्स खरीदते हैं तो इसका मतलब ये की आप उस कम्पनी में हिस्सा खरीद रहे हैं।

इस तरह अगर कम्पनी को नुकसान होता है तो आपको भी नुकसान होगा।

भारत मे मुख्य 2 स्टॉक मार्केट्स हैं BSE व NSE इसके बाद लगभग 28 अन्य भी हैं जैसे- Calcutta stock exchange
Cochin stock exchange
Pune stock exchange
Delhi stock exchange
Jaipur stock exchange इत्यादि।

भारत मे सबसे बड़ा स्टॉक मार्केट BSE को कहते हैं जिसके पास लगभग 2.3 लाख करोड़ का मार्किट कैपिटलाइजेशन है। (अप्रैल-2018)

$1 trillion dollar=1 लाख करोड़ रुपया (₹)

आप शेयर मार्केट के ब्रोकर यानी दलाल के द्वारा ही शेयर मार्केट में रजिस्टर होकर शेयर की खरीदफरोख्त कर सकते हैं। ये स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य होते हैं।

ब्रोकर आपके कहने पर आपके लिए शेयर खरीद और बेच भी सकता है।

स्टॉक मार्केट यानी शेयर मार्केट पर आपको रजिस्टर करने के बदले में ब्रोकर आपके कुछ Brokerage fee लगभग 0.2-5 प्रतिशत आपसे, आपके किए गए व्यापार में से अपना कमीशन लेता है।

आप शेयर मार्केट में बिज़नेस अपने घर पर डेस्कटॉप या मोबाइल एप्प पर कर सकते हैं।

नीचे हम शेयर मार्केट के बारे में गहराई से जानेंगे।

Share market का इतिहास

भारत मे शेयर मार्केट की शुरुआत उस वक्त से है जब बॉम्बे टाउन हॉल के पास बरगद के पेड़ के नीचे ब्रोकरों की भीड़ जमा होकर सौदे किया करती थी। बात सन् 1855 की है।

बाद में यानी सन् 1875 में प्रेमचंद रॉयचंद ने BSE यानी Bombay stock exchange की स्थापना की। जिसे पुरानी जगह से अलग एक स्थायी जगह मिली Dalaal street यानी ब्रोकर स्ट्रीट।

उस समय सारे कारोबार खुले में बोलकर ही किए जाते थे। लेकिन सन् 1992 में NSE के आने के बाद भारतीय शेयर मार्केट की दशा और दिशा दोनो बदल गई।

ईसी समय शेयर बाजार में कुछ गड़बड़ियों को भी देखा गया जिसके चलते भारत सरकार ने SEBI यानी Security exchange board of India की स्थापना की।

आज किसी भी कंपनी को BSE या NSE में खुद को listed होने के लिए SEBI के पास जाना होता है। सेबी द्वारा उस कंपनी को वेरीफाई करने में 6-12 माह या उससे अधिक का समय लगता है।

1992 में NSE के आते ही कम्प्यूटराइजेशन की प्रक्रिया शुरू हुई और NSE को कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया।

NSE के बाद 1995 में BSE को भी इसी प्रक्रिया के तहत कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया।

आज BSE पूरे एशिया का पहला और सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। जिसे बॉम्बे पहले बम्बई, स्टॉक एक्सचेंज कहते हैं।

SENSEX और NIFTY क्या हैं

BSE के Index को Sensex के नाम से जाना जाता है। यानी BSE में लिस्टेड तो लगभग साढ़े 5 हजार कम्पनियाँ हैं, लेकिन इनमें से सबसे बड़ी 30 कंपनियों के औसत प्रदर्शन के आधार पर सूचकांक का प्रदर्शन किया जाता है।

ताकि लोगों को एक अनुमान मिल सके कि आज के बाजार का रुख कैसा है।

इसलिए ये जरूरी नहीं कि अगर मार्केट नीचे गिर रहा है तो सभी कंपनियों के शेयर्स के दाम गिर गए हैं

सेंसेक्स को Sensitive + Index के शब्दों को मिलाकर संयुक्त रूप से Sensex कहते हैं।

इसमें लिस्टेड कुछ बड़ी कम्पनियों के नाम- ACC (cement) Tata motors, Infosys, Wipro, ONGC इत्यादि हैं।

ठीक इसी तरह NSE के Index को Nifty के नाम से जाना जाता है। इसमें 50 बड़ी कम्पनियों के बाजार में प्रदर्शन के हिसाब से सूचकांक को प्रदर्शित किया जाता है।

Nifty का नाम दो शब्दों National + Fifty को संयुक्त कर निफ़्टी दिया गया है। जिसमे 50 कम्पनियों का प्रदर्शन शामिल है।

NSE में लगभग 1600 से अधिक कम्पनियाँ लिस्टेड हैं। जिनमें से कुछ बड़ी कम्पनियाँ के नाम Ambuja, Hindustan petroleum, Hero motocorp ltd. Bharti airtel इत्यादि हैं।

Share market में Invest कैसे करें

शेयर मार्केट में Invest करने के लिए सबसे पहले आपको इसके बारे में तमाम स्रोतों से या क्लासेस जॉइन करके Share market के Basics के बारे में जान लेना चाहिए।

क्योंकि ये ऐसा जगह है जहां आप बहुत ही कम समय मे करोड़पति भी बन सकते हैं और भिखारी भी।
इसलिए इस क्षेत्र में उतरने से पहले जानकारी इकट्ठा कर लें।

Starting स्टेप्स

शेयर मार्केट में बिज़नेस करने के लिए किसी भी बैंक में एकाउंट होना जरूरी है।

उसके बाद आपको एक Demat account तथा एक Trading account खुलवाना पड़ेगा अगर आप चाहें तो किसी ब्रोकर के माध्यम से खुलवा लें या फिर अपने बैंक में भी खुलवा सकते हैं।

ऑनलाइन भी ब्रोकर्स को पाया जा सकता है जैसे- Zerodha, Wisdom capital, Angel broking, Sharekhan इत्यादि हैं।

ये खाते आप ऑनलाइन खोल सकते हैं लेकिन एक Document जिसे Power of attorney कहते हैं उसे आपको अपने ब्रोकर के पास कूरियर करना पड़ता है।

ये खाते ऑनलाइन खोलने में 15-20 मिनट लगते हैं

Demat account क्या है

जैसा कि नाम से पता चलता है डिमैट De materialize यानी आप जो भी स्टॉक्स या शेयर खरीदेंगे वो एक मटेरियल यानी पदार्थ न होकर डिजिटल फॉर्म में या पैसे के रूप में आपके खाते में सुरक्षित रहती है।

जब आप उसे खरीद लेते हैं तो वो चीज आपकी डिमैट एकाउंट में Save हो जाती है। मतलब की आपके खाते में शेयर सुरक्षित होते हैं।

Trading account क्या है

जब भी आप डिमैट एकाउंट खुलवाते हैं तो साथ मे एक Trading account भी खोला जाता है। इसका उपयोग आप शेयर्स को खरीदने में पैसे देने के लिए करते हैं।

इसमे पैसे अपने Saving account से लिए जाते हैं। आपको जितनी जरूरत हो आप अपने सेविंग्स से ट्रेडिंग एकाउंट में डालकर ट्रेडिंग कर सकते हैं।

What is share market in hindi-शेयर मार्केट हिंदी में/share market basics

Trading करने के लिए आपको अपने ब्रोकर द्वारा उपलब्ध कराए गए सॉफ्टवेयर की मदद से या मोबाइल एप्प की मदद से आप व्यापार कर सकते हैं।

Share market Basics

शेयर मार्केट में बिज़नेस करने के अपने कुछ अलग Fundamentals हैं।

आपको एक रणनीति के तहत इसमे निवेश करना होता है। आइए हम इसके बारे में कुछ जानकारी हासिल करते हैं।

सबसे पहले तो आपको शेयर मार्केट में पैसा अपने बचत यानी Savings से लगानी चाहिए। जिससे की घाटा होने पर भी आपको ज्यादा फर्क ना पड़े।

अगर आप खाते में या ट्रेडिंग के लिए दो लाख रुपया निर्धारित करते हैं तो इसमें 80% पैसा आप long term के स्कीम्स में इन्वेस्ट करें और बाकी 20% का पैसा आप शार्ट टर्म के स्कीम्स में निवेश करें।

कभी भी सारा पैसा किसी एक कंपनी के शेयर में ना लगाएं। हमेशा अलग अलग कंपनियों के शेयर्स खरीदें

किसी के कहने पर शेयर्स न खरीदें न ही टीवी पर Ads देखकर, इसके लिए आप अपने दिमाग व Newspapers, Economy growth इत्यादि को पढ़कर अपना आईडिया लगाएँ।

किसी भी कंपनी के शेयर्स खरीदने के लिए कंपनी के पिछले रिकार्ड्स और उसके ग्रोथ रेट यानी विकास दर को जरूर चेक कर लें। हो सके तो बड़ी कंपनियों के शेयर्स खरीदें।

शेयर मार्केट को प्रभावित करने में सैकड़ों फैक्टर्स जिम्मेदार होते हैं। अगर सारे फैक्टर्स को देखकर शेयर खरीदे जाएं तो भी 100% सफलता की गारंटी नहीं होती।

काफी वक्त शेयर मार्केट में गुजारने के बाद अगर आपको ऐसा लगे कि आपको अनुभव अच्छा खासा हो गया है, तो आप Intraday बिज़नेस में भी हाथ आजमा सकते हैं।

मैंने बहुत से लोगों को शुरू में ही Intraday करते हुए देखा है जो बहुत जल्दी ही सबकुछ गंवा देने के बाद इस बिज़नेस से तौबा कर लेते हैं। इसलिए आप बढ़िया रणनीति से निवेश करें।

Mutual Funds क्या होते हैं

म्यूच्यूअल फंड्स एक निवेश कार्यक्रम होता है। जहां पर छोटे छोटे रिटेल या अन्य इन्वेस्टर्स से पैसे लेकर एक्सपर्ट्स द्वारा अलग अलग बांड्स या स्कीम्स में पैसे लगाया जाता है।

इसमें निवेशकों को कुछ नहीं करना पड़ता इसके लिए Share market के पेशेवरों द्वारा जिन्हें मार्केट के बारे में गहरी जानकारी होती है, वो आपके पैसे इन्वेस्ट करते हैं।

इसके लिए आप SIP यानी Systematic Investment plan के जरिए भी हर महीने 500 रुपये से जमा करना शुरू कर सकते हैं।

इसमें आप पैसे जब चाहें निकाल भी सकते हैं।

अगर आपको long term में दिक्कत होती हो  और निवेश के लिए पैसे हों तो आप सबसे सुरक्षित माने जाने वाले म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश कर सकते हैं।

इसमे आपके रकम से लगभग 2-3% कट कर के कंपनी आपको पैसे लौट देती है।

यहां आपको सबसे कम जोखिम रहता है। खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें मार्किट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती।

आप किसी भी प्रोफेशनल से सलाह लेके इसमे इन्वेस्ट कर सकते हैं।

IPO क्या होते हैं

IPO यानी Initial public Offering. जब कोई कंपनी अपने शेयर्स यानी कम्पनी की हिस्सेदारी को पहली बार आम लोगों के लिए जारी करती है उसे IPO कहते है।

ये प्रक्रिया इसलिए कम्पनी करती है ताकि वो शेयर मार्केट में सूचिबद्ध हो सके।

चूंकि पब्लिक को शेयर्स देने का मतलब की कंपनी में लोगों को हिस्सा देना है;
ये प्रक्रिया उसे शेयर मार्केट में Listing के लिए जरूरी होती है।

अब जब उसे पैसों की जरूरत पूरी हो जाती है यानी उसके सारे शेयर्स बिक जाते हैं तो कम्पनी 
निवेशकों के पैसे कंपनी के इंफ्रास्ट्रक्चर इत्यादि में लगाती है।

जब कम्पनी को लाभ होता है तो वो लाभ निवेशकों द्वारा खरीदे गए शेयर्स के हिसाब से उन्हें लाभ देती है। जब जब कम्पनी को पैसों की जरूरत हो वो दुबारा शेयर्स बेचने के लिए ला सकती है।

अब जो निवेशक कम्पनी के शेयर खरीदे होते हैं वो पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं कि अपने शेयर यानी कम्पनी में हिस्सेदारी फिर से कम्पनी के ग्रोथ के हिसाब से ऊँचे दामों पर बेच सके।

Intraday

इसमें वही व्यक्ति बिज़नेस करता है जिसे काफी समय शेयर मार्केट में हो चुका है और वो बहुत सारा अनुभव प्राप्त कर चुका है।

इसमें सुबह जब मार्केट खुलता है तब आदमी शेयर खरीदता है और शाम तक बाजार बंद होने से पहले प्रॉफिट हो या Loss शेयर बेच देना होता है।

Intraday बिज़नेस एक दिन के लिए होता है। इसमें पैसे प्रॉफिट यानी फायदा कमाने के लिए लगाया जाता है। इसमें पैसे से कारोबार को Investment करना नहीं कहा जाता है।

Blue chip कंपनियां क्या होती हैं

ब्लू चिप कंपनियां या उनके शेयर्स वो होती हैं जो  काफी मजबूत व प्रसिद्ध हैं।
साथ ही बहुत पहले से इस मार्केट में मौजूद हैं और उनके पिछले Returns और ग्रोथ रेट अच्छे होते हैं।

ब्लू चिप कंपनियों में पैसे डूबने के रिस्क बहुत कम होता है। इन कम्पनियों में निम्न कम्पनियां शुमार हैं जैसे-

TCS (Tata consultency services)
ONGC (Oil and natural gas corp.)
Infosys
Sun pharma

Portfolio क्या होता है

कई Investors स्टॉक मार्केट से कई तरह के स्टॉक्स खरीदकर रखे होते हैं, यानी Hold पर रखते हैं। उस स्टॉक्स के समूह को पोर्टफोलियो कहते हैं।

होल्ड पर इसलिए रखा जाता है ताकि बाद में शेयर्स के भाव बढ़ने पर शेयर बेचकर मुनाफा कमा सकें।

Bull market

जब share market अच्छा जा रहा हो यानी इंडेक्स ऊपर जा रहा हो उसे Bull मार्केट कहते हैं। इसमें शेयर्स के दाम बढ़ते हैं। इसके उलट अगर मार्केट नीचे जा रहा हो तो उसे Bear मार्केट कहते हैं।

Small, Mid और Large Cap. कम्पनियां

शेयर बाजार में कम्पनियों को उनके एसेट के आधार पर 3 भागों में बांटा गया है।
जिस कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन अधिक है वो Large cap व मध्यम को mid cap व सबसे कम को Small cap कहते हैं। नीचे पढें

Market capitalization

इसका आधार कम्पनी के शेयर्स की संख्या को वर्तमान में मौजूद उसके भाव को Multiply यानी गुणा करके निकाला जाता है।
इससे पता चलता है कि कम्पनी के पास कितने रुपये के शेयर्स हैं और कम्पनी कितनी मजबूत स्थिति में है।

Margin money

जब आप अपने ब्रोकर के खाते से उधार पैसे लेकर स्टॉक्स की खरीददारी करते हैं उसे मार्जिन मनी कहते हैं। बाद में उस पैसे को शेयर ब्रोकर के कमीशन सहित वापस करना होता है।

Dividend money

जब कोई कम्पनी निवेशकों द्वारा इन्वेस्ट किए गए पैसों से अच्छी प्रॉफिट करती है तो वो उसमे से कुछ हिस्सा निवेशकों के बीच (Distribute) बांट देती है। इसकी को Dividend money कहते हैं।
कम्पनी ये पैसा चाहे तो फिर इन्वेस्ट भी कर सकती है।

Free float या Public float shares

ये किसी भी कंपनी के उन शेयर्स की जानकारी देता है जिनके ओनरशिप Public के पास होता है। यानी इनके ऊपर अधिकार इनमे इन्वेस्ट किए लोगों के पास होता है।

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