Firewall क्या है, कैसे काम करता है इसके फायदे व नुकसान

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Firewall  क्या है, कैसे काम करता है, ये कितने तरह के होते हैं ? इनके फायदे व नुकसान इत्यादि के बारे में सभी टॉपिक्स पर गहराई से मंथन।

दुनिया दो चीजों से मिलकर बनी है। तभी तो जब पहला नेटवर्क वायरस Creeper ARPANET के नेटवर्क पर फैला था तो उसके जवाब में Reaper नाम का Antivirus बना था।

इंटरनेट के आविष्कार के समय से ही सिक्योरिटी को लेकर काफी शोध किए गए। जिसके परिणामस्वरूप नए नए उपकरण भी बने।

इन्ही में से एक है Firewall. जो आजकल सभी अच्छे मॉडेम, राऊटर इत्यादि में Inbuilt होकर आता है।

इसकी जगह किसी भी नेटवर्किंग डिवाइस में सबसे महत्वपूर्ण है। ये Windows में तो Inbuilt ही होकर आता है। इन्ही कारणों की वजह से इसे First line Security कहते हैं।

 Firewall क्या है

Firewall कम्प्यूटर सिस्टम के नेटवर्क को सुरक्षित व Secure बनाने की एक तकनीक है।

ये नेटवर्क को फ़िल्टर करने के लिए Use किया जाता है। यानी इसका प्रयोग किसी भी नेटवर्क में  unauthorized चीजें Spread यानी ना फैलें इसके लिए उपयोग किया जाता है। ये चीजें जैसे Virus, Trojans, spyware, malicious links इत्यादी हो सकती हैं।

Firewalls (Hardware & Software)

Firewall तकनीक Software और Hardware दोनो Types में मौजूद है। कंप्यूटर पर इसके Antivirus सॉफ्टवेयर प्रोग्राम को install कर के इस्तेमाल किया जा सकता है।
लगभग सभी अच्छी एंटीवायरस एप्स firewalls का काम करती हैं।

Hardware डिवाइस को खरीदकर भी इसे अपने नेटवर्क पर सेटअप किया जा सकता है। हम नीचे हार्डवेयर firewalls devices उपलब्ध कराने वाली कंपनियों के बारे में जानेंगे।

Firewall कैसे काम करता है

जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है ये एक सुरक्षा दीवार का काम करता है। जिससे फ़िल्टर होकर यूजर के requested डेटा पैकेट का आना जाना होता है।

हम इसे इस तरह आसानी से समझ सकते हैं।

मानलिजिये किसी आफिस/घर मे एक या कई कंप्यूटर्स हैं। ये आपस मे एकदूसरे से नेटवर्क के माध्यम जैसे wifi से जुड़े हुए हैं। ऐसे नेटवर्क को Private नेटवर्क कहते हैं।

जब भी कोई यूजर अपने घर मे या आफिस में रखे कंप्यूटर या अन्य devices के माध्यम से पब्लिक नेटवर्क जैसे Internet से जुड़ता है तो उसके कंप्यूटर में इंटरनेट पर फैले तमाम harmful सॉफ्टवेयर्स के पहुंचने की आशंका हमेशा बनी रहती है।

Firewall इन्ही Private व Public network के बीच एक सुरक्षा दीवार की तरह काम करता है। ये बीच मे दोनो तरफ के नेटवर्क को प्रोटेक्ट करता है। यूजर के कंप्यूटर से इंटरनेट पर कोई वायरस वगैरह को जाने से रोकता है, और इंटरनेट से यूजर के कंप्यूटर को होनेवाले नुकसान से बचाता है।
इसलिए इसे Two way protection प्रदान करने वाला कहते हैं।

जब भी कोई रिक्वेस्ट यूजर द्वारा इंटरनेट पर भेजी जाती है तो वो request सबसे पहले Firewall device या सॉफ्टवेयर के पास पहुंचती है।

Firewall उस रिक्वेस्ट के डेटा पैकेट और उसके साथ के Network ID को याद कर लेता है। जब उसकी रिजल्ट वापस इंटरनेट से उसके पब्लिक नेटवर्क में आती है तो फिर बीच मे Firewall उसे रोक लेता है और डेटा पैकेट की जांच अपने अंदर Trusted rules और यूजर के allowance को चेक करता है। साथ ही थर्ड पार्टी एप्स, वायरस इत्यादि की जांच करने के बाद फिर उन्हें प्राइवेट नेटवर्क में आने देता है।

इस तरह से Firewall हमारे नेटवर्क को Unauthorozed थर्ड पार्टी सॉफ्टवेयर्स से बचाता है।

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Advantage & Disadvantage of Firewall

Firewall के तमाम ख़ासियतें हमने जानीं लेकिन इसके कुछ Disadvantage भी हैं। अगर आप बढ़िया कंपनी का Firewall सिक्योरिटी नहीं इस्तेमाल करते तो ये आपके सिस्टम के रेसोर्सस जैसे CPU, RAM इत्यादि का अधिक उपयोग करते हुए सिस्टम को थोड़ा Slow भी कर सकता है।

Firewalls एक पावरफुल सिक्योरिटी tools होते हुए भी इनके कुछ limitations हैं। ये आपको बाहरी नेटवर्क से Protect तो करते हैं लेकिन अगर आपके कंप्यूटर में floppy डिस्क या अन्य इंटरनल माध्यम, Backdoor से वायरस, malwares या कोई भी harmful सॉफ्टवेयर सिस्टम में पहुंच जाते हैं तो यहां Firewalls आपको Protect नहीं कर पाते हैं।

वहीं अगर आप सॉफ्टवेयर फ़ायरवॉल इस्तेमाल कर रहे हैं तो ये सिर्फ उसी कंप्यूटर को Protect करेगा जिसमें फ़ायरवॉल Installed हो। ज्यादातर PCs में सॉफ्टवेयर firewalls ही एंटीवायरस के रूप में Use की जाती हैं।

इसतरह सभी सिस्टम्स में फायरवाल इंस्टालेशन जरूरी हो जाता है। हां अगर आप Windows का इस्तेमाल करते हैं तो उसमे ये Inbuilt होकर कम्पनी की तरफ से आता है। यूजर उसे अपने हिसाब से भी Configure कर सकता है।

वहीं अगर आप हार्डवेयर डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं तो ये एक साथ कई systems को प्रोटेक्ट करेगा।

लेकिन बेहतर Performance और सिक्योरिटी के लिए हर दो कंप्यूटर्स के बीच मे एक फ़ायरवॉल डिवाइस लगाना सबसे बढ़िया होता है।

Types of Firewall (Technology)

Firewall को इसके कार्य के आधार पर पांच भागों में बांटा गया है। जो जरूरत और सुधार को ध्यान में रखकर इस्तेमाल में लाया जा सकता है।

ये अलग अलग थ्योरी पर काम करते हैं लेकिन उद्देश्य नेटवर्क सिक्योरिटी ही होती है।

 [icon name=”circle” class=”” unprefixed_class=””]  Packet-filtering firewalls

 [icon name=”circle” class=”” unprefixed_class=””]  Stateful inspection firewalls

[icon name=”circle” class=”” unprefixed_class=””]  Circuit-level gateways

[icon name=”circle” class=”” unprefixed_class=””]  Application-level gateways

[icon name=”circle” class=”” unprefixed_class=””]  Next-gen firewalls

[icon name=”circle” class=”” unprefixed_class=””]  Packet-filtering firewalls

ये थ्योरी या प्रोग्राम सबसे पुरानी फ़ायरवॉल तकनीक है। जो जानेवाले व आनेवाले डेटा पैकेट्स को उसके Headers, IP एड्रेस, पोर्ट्स इत्यादि के आधार पर जांच करता है।

Stateful inspection firewalls

ये तकनीक उपरोक्त तकनीक से काफी अच्छी और advanced है क्योंकि ये Application layer की सुरक्षा प्रदान करती है।

ये पैकेट के header के आधार पर नहीं बल्कि पैकेट के Contents के आधार पर उसके पोर्ट्स, destination सोर्स इत्यादि के आधार पर डेटा पैकेट की जांच करके नेटवर्क में आने की अनुमति देता है।

ये तकनीक पैकेट डेटा को Administrator के defined नियमों पर ही नहीं बल्कि जो डेटा नेटवर्क से पहले से Passed हो चुके हैं उनके आधार पर भी डेटा फ़िल्टरिंग करता है।
ये तकनीक डेटाे फ्लो की गति थोड़ी कम कर सकता है।

Circuit-level gateways

ये तकनीक Proxy की भांति कार्य करता है और ट्रैफिक को सर्किट-लेवल फ़िल्टरिंग प्रदान करता है, जिसकी सिक्योरिटी लगभग एप्लीकेशन लेयर के बराबर होती है।

ये ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल (TCP) Handshake को वेरीफाई करते हुए सिक्योरिटी प्रोवाइड कराता है। ये खुद डेटा को फ़िल्टर नहीं करता है। ये सिर्फ डेटा के सोर्स को वेरीफाई करता है।

इसलिए अगर डेटा का सोर्स Valid है और डेटा पैकेट में malware है तो भी ये सिस्टम में Pass कर देगा। जिससे कंप्यूटर्स इन्फेक्टेड हो सकते हैं।
हालांकि ये एक बार TCP/UDP कनेक्शन्स के स्थापित हो जाने के बाद दुबारा चेक किए बिना डेटा फ्लो होता है।

Application-level gateways

Firewall तकनीक पर काम करने वाले सिक्योरिटी माध्यमों में ये नेटवर्क कनेक्शन को सबसे बेहतर सुरक्षा प्रदान कराता है।

ये एक Proxy की भांति कार्य करता है। जैसे VPN सर्विस में होता है हमारा डेटा पैकेट VPN के प्रॉक्सी सर्वर से होकर हमें प्राप्त होता है। ठीक उसी प्रकार ये क्लाइंट और डेस्टिनेशन के बीच एक प्रॉक्सी सर्वर कनेक्शन स्थापित करता है। इस तरह यूजर को डेटा पैकेट सबसे पहले प्रॉक्सी सर्वर पर आता है फिर Proxy server से User के पास आता है।

इस तरह यूजर के सिस्टम और उसकी नेटवर्क ID Secure रहती है। हालांकि इसके आपरेशन में कंप्यूटर के Resources का सर्वाधिक इस्तेमाल होता है।

Next-Gen firewalls

Firewall सिक्योरिटी सिस्टम्स में ये सबसे उन्नत और बेहतर Capability के साथ सिस्टम को Secure करता है।

ये उपरोक्त के सभी तकनीक जैसे State Inspection, डेटा को फ़िल्टर करना इत्यादि सभी मुख्य रूल्स को Apply करती हैं

ये नए और Smart ways में सिस्टम की सुरक्षा Secure करती हैं। डेटा पैकेट पर कई तरह के सुरक्षा मैकेनिज्म Apply कर डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

ये एक signature-based इंजन की तरह कार्य करते हैं जिनमें Intrusion की संभावना नहीं होती। पहले के firewalls की सभी अच्छी तकनीक को शामिल किए हुए होती हैं।

Best Firewalls (Hardware & Software)

Firewalls का इस्तेमाल Personal से लेकर कंपनी और Organizatons सभी के लिए किया जा सकता है।
जबकि पर्सनल उपयोग के लिए थोड़े कम दामों में firewalls सिस्टम आते हैं जबकी बड़े नेटवर्क्स के लिए महंगे दामों में आते हैं।

बहुत सी कंपनियां firewalls softwares और हार्डवेयर devices मार्केट में उतारी हैं।
जिनमे से कुछ अच्छी कंपनियां निम्न हैं-

●  Cisco
●  McAfee
●  Chek Point
●  Forti Gate
●  Palo Alto networks
●  Cyberoam
●  Sonicwall
इत्यादि कंपनियों के devices अच्छे आते हैं।

Conclusion

इस पोस्ट में हमने ये जाना कि Firewall क्या है और कैसे काम करता है। इस पोस्ट का निष्कर्ष ये निकलता है कि आज के जमाने मे Firewall बहुत ही जरूरी है। लेकिन साथ में ये सावधानी भी की जब भी Use करें Trusted कम्पनी की  Firewall सर्विस चुनें। अधिक जानकारी के लिए आप इसे अंग्रेजी में यहां भी पढ़ सकते हैं।

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