What is Broadband in hindi-DSL, Fiber-optic इत्यादि

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What is broadband and how it works in hindi

What is Broadband in hindi के इस पोस्ट में हम ब्रॉडबैंड इनके प्रकार व कार्य के बारे में विस्तार से जानेंगे।

Broadband हाई-स्पीड इंटरनेट डेटा access करने का माध्यम है।

जिसमे बैंड जो है वो ब्रॉड यानी विड्थ है। मतलब ये हुआ कि frequencies का समूह एक अकेले सिग्नल को carry करता है। जिसकी वजह से इसकी स्पीड पहले के डायल-अप कनेक्शन की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाती है।

सिंपल भाषा मे बैंडविड्थ जितनी अधिक होगी डेटा की क्वांटिटी और क्वालिटी उतनी बेहतर होगी।

आजकल अगर आप कोई राऊटर खरीदने जाएं और दुकानदार से राऊटर, wifi, dongle इत्यादि नाम से डिवाइस मांगेंगे तो हो सकता है दुकानदार आपको एक ही डिवाइस देगा।

आजकल ब्रॉडबैंड कनेक्शन कनेक्ट करना हो या wifi या मॉडेम, डिवाइस बनाने वाली कंपनियाँ एक ही सेट-टॉप-बॉक्स में सभी जरूरी रिसीवर्स लगा के दे रही हैं। यानी कॉम्बो पैक जिसमे मॉडेम और राऊटर दोनो सेट आते हैं। (Modem= Modulator Demodulator)

बॉक्स के पीछे आपको वायर कनेक्शन के लिए अलग अलग होल मिल जाते हैं। जिससे आप केबल कनेक्ट कर ब्रॉडबैण्ड या अन्य wired इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं।

इसके पहले की हम Broadband पर आगे बढ़ें इससे पहले हम Dial-up connection के बारे में थोड़ा जान लेते हैं।

ये डायल-अप कनेक्शन को DSL ने Replace किया। पहले हमारे घरों में आने वाले टेलीफोन केबल से हम इंटरनेट भी इस्तेमाल करते थे।

लेकिन इसमें गड़बड़ी ये होती थी कि हम एक समय मे एक ही चीज उपयोग कर सकते थे। चाहें हम बात करें या फिर इंटरनेट Use करें।

यानी ISP (Internet service provider) की तरफ से हमे निर्देशित किया जाता था कि हम एक Specific नम्बर डायल करें। जब हम नम्बर डायल करते थे तो हमारे ISP हमें नेट से जोड़ देते थे। इधर हम फ़ोन को उठा कर साइड में रख देते थे। क्योंकि बिना ऐसे किए लाइन चालू नहीं रह सकती थी।

ऐसे में हम नेट तो Use करते थे लेकिन फ़ोन कहीं से भी आ या जा नहीं सकता था। इसे ही Dial-up कनेक्शन कहा जाता है।

इसके बाद आया ब्रॉडबैंड ; जबतक plugged out न किया जाय तबतक चालू ही यानी ON ही रहेगा।

अब हम ब्रॉडबैंड के बारे में जानेंगे।

हमारे घर मे लगने वाले ब्रॉडबैंड 4 अलग अलग फॉर्म में होते हैं।
1- Fiber-optic
2- DSL
3- Cable
4- Satellite

Fiber-optic

सबसे नई टेक्नोलॉजी आई है वो है फाइबरऑप्टिक। इसमें फाइबर और गिलास का उपयोग डेटा transmission में किया जाता है।

इसकी इंटरनेट प्रोवाइड कराने की स्पीड DSL व Cable माध्यम से तेज है, या यूं कह सकते हैं कि सबसे तेज है

लेकिन इसके फाइबर-ऑप्टिक केबल्स को जमीन के नीचे बिछाने में समय व खर्च दोनो ज्यादा आता है। लेकिन इसकी डेटा स्पीड इसके इंस्टालेशन में आने वाले खर्च को महंगा साबित नहीं होने देती।

Fiber-optic कैसे कार्य करती है

इसमें हमारे डेटा Light form में Convert होकर लगभग Light ही यानी प्रकाश की गति में ट्रेवल करती हैं। ये जिस माध्यम में गति करती हैं वो पाइपनुमा बहुत ही पतली यानी इंसानी बाल जितना महीन धागे जैसी संरचना की पाइप होती है जिसमे हमारा डेटा travel करता है।

फिर अपने सर्वर तक पहुंचने पर इसे वापस लाइट फॉर्म से digital form में बदल दिया जाता है।

DSL (Digital subscriber line)

DSL connection दो तरह के होते हैं पहला होता है :- ADSL व दूसरा SDSL

ADSL-Asymmetric digital subscriber line –
आजकल सबसे अधिक उपयोग इसी कनेक्शन का होता है। इसमें हम Phone call के दौरान भी Internet का Use कर सकते हैं। क्योंकि फोन कॉल और इंटरनेट के लिए इसमे स्प्लिटर से दो अलग अलग पोर्ट मिलते हैं।

ADSL व SDSL कैसे कार्य करता है

ADSL– इसमे तमाम कम्पनियां जैसे BSNL, Airtel इत्यादि अपने केबल के जरिए आपके बिल्डिंग या पास में एक बोर्ड लगाती हैं जिसे Splitter कहते हैं।
इस स्प्लिटर में कई पोर्ट होते हैं जिनके माध्यम से लोगों को कनेक्शन बांट दिए जाते हैं।

हम इन स्प्लिटर से अपने घर मे जब केबल लाते हैं तो और एक स्प्लिटर लगाते हैं। जिसमें दो पोर्ट होते हैं एक फ़ोन लाइन के लिए और दूसरा इंटरनेट इस्तेमाल के लिए।

हम इंटरनेट इस्तेमाल होने वाले वायर को Modem से कनेक्ट कर देते हैं ताकि वायर से आने वाले एनालॉग सिग्नल्स को मॉडेम वापस digital फॉर्म में कन्वर्ट कर दे।

बिना डिजिटल फॉर्म में कन्वर्ट किए कंप्यूटर इसे समझ नहीं पाता है। क्यों की कंप्यूटर सिर्फ डिजिटल फॉर्म में डेटा को recognize करता है।

अब मॉडेम में कनेक्ट करने के बाद आप wifi के द्वारा या सीधे कंप्यूटर से कनेक्ट कर इंटरनेट इस्तेमाल कर सकते हैं।

अब तो Modem और Router एक ही set-टॉप-बॉक्स में आने लग गए हैं इसलिए अलग अलग दो Devices खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

ADSL Connection में हमे डाउनलोड की speed ज्यादा मिलती है। लेकिन अपलोड की speed थोड़ी कम होती है।

SDSL (Symmetric digital subscriber line) इसमे डाउनलोड और अपलोड स्पीड दोनो बराबर स्पीड में होती है। इसमें भी call के दौरान Internet का इस्तेमाल कर सकते हैं। बाकी सब ADSL की ही तरह काम करती हैं।

हालांकि अब DSL का अपग्रेडेड version आ गया है जिसे VDSL यानी very high bitrate DSL कनेक्शन कहते हैं।

VDSL में fiber-optic केबल का use होने से इसकी स्पीड काफी ज्यादा लगभग 50 mbps से अधिक का होता है।
अब देखते हैं VDSL 2 में क्या मिलता है।

Cable

इस प्रकार के कनेक्शन घरों में आने वाले TV सेट के केबल्स के through आते हैं। इनके द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले कोएक्सल (coaxle) केबल होते हैं।

इन केबल्स में स्टेशन से घर तक पहुंचने में दूरी बढ़ने पर केबल में शोर-गुल(नॉइज़) बहुत ज्यादा हो जाती है और net की speed धीमी हो जाती है।

इनकी बैंडविड्थ निर्धारित होने की वजह से Users की संख्या बढ़ने पर इंटरनेट की स्पीड धीमी हो जाती है।

हालांकि केबल ऑपरेटर चाहें तो आपको ज्यादा स्पीड में डेटा उपलब्ध करा सकता है। लेकिन इसमें एक दिक्कत ये आती है कि ये जो bandwidth उपयोग करते हैं वो Shared होता है।

यानी इनके द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली इंटरनेट सर्विस में Users की संख्या बढ़ती है तो internet की स्पीड slow हो जाती है।

जैसे-जैसे Users की संख्या कम होती है वैसे-वैसे स्पीड नार्मल होने लगती है। हालांकि इनकी Price थोड़ी कम भी होती है।

Satellite

सैटेलाइट के माध्यम से इंटरनेट अधिकतर उन Areas में उपलब्ध कराया जाता है, जहां के भौगोलिक स्थिति दुर्गम, दूर-दराज और पहाड़ी हो।
जहां आसानी से कोई भी भूमिगत केबल्स ना बिछ पाएं। इसका इंस्टालेशन काफी महंगा है।
अगर मौसम बहुत खराब हो जाए तो ये लगभग ठप्प हो जाता है।

What is broadband के विषय मे अधिक जानकारी के लिए आप इसे विकिपीडिया पर पढ़ सकते हैं।

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